*👨👨👦👦सच्ची भक्ति का फल💯*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सच्ची भक्ति का फल ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ कृष्ण 13/14 एक ही दिन समाहित है, गुरुवार 08 फरवरी 2024 कलिकाल के प्रथम तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में सर्व सुखकारक रत्नत्रय के संस्कार प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 माघ अमावस्या शुक्रवार 09 फरवरी ग्यारवें तीर्थंकर गुरुकी महादशा को अनुकूल बनाने वाले श्रेयांसनाथ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*फरवरी माह में दिनांक 11, 13, 15, 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
*🔔🪔 यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
वृंदावन की एक गोपी रोज दूध दही बेचने मथुरा जाती थी,
एक दिन व्रज में एक संत आये, गोपी भी कथा सुनने गई,
संत कथा में कह रहे थे, भगवान के नाम की बड़ी महिमा है, नाम से बड़े बड़े संकट भी टल जाते है।
नाम तो भव सागर से तारने वाला है,
यदि भव सागर से पार होना है तो भगवान का नाम कभी मत छोडना।
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कथा समाप्त हुई गोपी अगले दिन फिर दूध दही बेचने चली,
बीच में यमुना जी थी. गोपी को संत की बात याद आई, संत ने कहा था भगवान का नाम तो भवसागर से पार लगाने वाला है,
जिस भगवान का नाम भवसागर से पार लगा सकता है तो क्या उन्ही भगवान का नाम मुझे इस साधारण सी नदी से पार नहीं लगा सकता ?
ऐसा सोचकर गोपी ने मन में भगवान के नाम का आश्रय लिया भोली भाली गोपी यमुना जी की ओर आगे बढ़ गई।
अब जैसे ही यमुना जी में पैर रखा तो लगा मानो जमीन पर चल रही है और ऐसे ही सारी नदी पार कर गई,
पार पहुँचकर बड़ी प्रसन्न हुई, और मन में सोचने लगी कि संत ने तो ये तो बड़ा अच्छा तरीका बताया पार जाने का,
रोज-रोज नाविक को भी पैसे नहीं देने पड़ेगे।
एक दिन गोपी ने सोचा कि संत ने मेरा इतना भला किया मुझे उन्हें खाने पर बुलाना चाहिये,
अगले दिन गोपी जब दही बेचने गई, तब संत से घर में भोजन करने को कहा संत तैयार हो गए,
अब बीच में फिर यमुना नदी आई।
संत नाविक को बुलाने लगा तो गोपी बोली बाबा नाविक को क्यों बुला रहे है. हम ऐसे ही यमुना जी में चलेगे।
संत बोले - गोपी ! कैसी बात करती हो, यमुना जी को ऐसे ही कैसे पार करेगे ?
गोपी बोली - बाबा ! आप ने ही तो रास्ता बताया था, आपने कथा में कहा था कि भगवान के नाम का आश्रय लेकर भवसागर से पार हो सकते है.
तो मैंने सोचा जब भव सागर से पार हो सकते है तो यमुना जी से पार क्यों नहीं हो सकते ?
और मै ऐसा ही करने लगी, इसलिए मुझे अब नाव की जरुरत नहीं पड़ती.
संत को विश्वास नहीं हुआ बोले - गोपी तू ही पहले चल ! मै तुम्हारे पीछे पीछे आता हूँ,
गोपी ने भगवान के नाम का आश्रय लिया और जिस प्रकार रोज जाती थी वैसे ही यमुना जी को पार कर गई.
अब जैसे ही संत ने यमुना जी में पैर रखा तो झपाक से पानी में गिर गए, संत को बड़ा आश्चर्य,
अब गोपी ने जब देखा तो कि संत तो पानी में गिर गए है तब गोपी वापस आई है और संत का हाथ पकड़कर जब चली तो संत भी गोपी की भांति ही ऐसे चले जैसे जमीन पर चल रहे हो.
संत तो गोपी के चरणों में गिर पड़े, और बोले - कि गोपी तू धन्य है !
वास्तव में तो सही अर्थो में नाम का आश्रय तो तुमने लिया है और मै जिसने नाम की महिमा बताई तो सही पर स्वयं नाम का आश्रय नहीं लिया।
*👨👨👦👦⏰🙏🎪⛳विशेष:- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान समय में लगभग विश्व के अधिकाधिक लोग देव शास्त्र गुरु को तो मानते हैं, किंतु देव-शास्त्र-गुरु के अनुसार आचरण नहीं करते।इस कारण से यह संसार दु:खो का पहाड़ दिखाई दे रहा है। इसलिए सभी भव्य आत्माओं को अपनी शक्ति अनुसार आचरण सुधार कर जीवन सार्थक करना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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