मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

मेरे कुसंस्कार

*मेरे कुसंस्कार*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मेरे कुसंस्कार✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 4, बुधवार ,28 फरवरी 2024 कलिकाल के 6 वें  तीर्थंकर सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔🪔 मार्च माह की धार्मिक तिथियां 🔔*
*🎪17 से 25 तक आष्टान्हिका शाश्वत पर्व*
*🕉️22 मार्च आचार्य श्री चैत्यसागर महा मुनिराज का दीक्षा दिवस*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से प्रारंभ* 
 *🌞मार्च माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 1,2,4,6,7,9, ,12,14,16,17 ,29,30 दिनांकों में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आज हम समझते है कि हम सहजता पूर्वक अपने आत्मा पर, अपने परिवार व अन्य परिचित-अपरिचित   मिलने वालो पर  कुसंस्कार के बीजों की खेती कर देते है।*

 🔔गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी ।
  वृद्ध बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था, चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी, चेहरा झुर्रियों से भर चूका था बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।
घर में एक चीज़ अच्छी थी कि शाम को भोजन करते समय पूरा परिवार एक साथ टेबल पर बैठ कर भोजन करते  थे ।
एक दिन ऐसे ही शाम को जब सारे लोग भोजन करने बैठें थे। बेटा ऑफिस से आया था भूख ज्यादा थी सो जल्दी से हाथ मुंह धोकर भोजन करने  बैठ गया और साथ में बहु और एक बेटा भी भोजन करने लगे ।
 वृद्ध बाप के हाथ जैसे ही थाली उठाने को हुए थाली हाथ से छिटक गयी थोड़ी दाल टेबल पर गिर गयी । 
बहु बेटे ने घृणा की दृष्टि से पिता की ओर देखा और फिर से अपने भोजन में लग गए। वृद्ध पिता ने जैसे ही अपने हिलते हाथों से भोजन करना शुरू किया तो खाद्य पदार्थ कभी कपड़ों पे गिरता कभी जमीन पर । 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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बहु चिढ़ते हुए कहा – हे राम कितनी गन्दी तरह से भोजन करते हैं मन करता है इनकी थाली किसी अलग कोने में लगवा देते हैं , बेटे ने भी ऐसे सिर हिलाया जैसे पत्नी की बात से सहमत हो । 
बेटा यह सब मासूमियत से देख रहा था ।अगले दिन पिता की थाली उस टेबल से हटाकर एक कोने में लगवा दी गयी । 
पिता की डबडबाती आँखे सब कुछ देखते हुए भी कुछ बोल नहीं पा रहीं थी। वृद्ध पिता रोज की तरह भोजन करने लगा , खाद्य पदार्थ कभी इधर गिरता कभी उधर ।
 छोटा बच्चा अपना भोजन छोड़कर लगातार अपने दादा की तरफ देख रहा था । 
माँ ने पूछा क्या हुआ बेटे तुम दादा जी की तरफ क्या देख रहे हो और भोजन क्यों नहीं कर रहे । 
बच्चा बड़ी मासूमियत से बोला – माँ मैं सीख रहा हूं कि वृद्धों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप लोग वृद्ध हो जाओगे तो मैं भी आपको इसी तरह कोने में भोजन करवाउंगा।

बच्चे के मुँह से ऐसा सुनते ही बेटे और बहु दोनों काँप उठे शायद बच्चे की बात उनके मन में बैठ गयी थी क्योंकि बच्चा ने मासूमियत के साथ एक बहुत आवश्यक सबक दोनों लोगो को दिया था ।

बेटे ने जल्दी से आगे बढ़कर पिता को उठाया और वापस टेबल पे भोजन के लिए बिठाया और बहु भी भाग कर पानी का गिलास लेकर आई कि पिताजी को कोई तकलीफ ना हो ।

*👨‍👨‍👦‍👦⛳🌞💯🔔विशेष:-भव्य आत्माओं,माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें लेकिन माँ बाप से बढ़कर धन इस दुनिया में कोई नहीं है । इसका मुख्य कारण यह है कि उन्होंने हमें अच्छे संस्कार देकर हमें इस योग्यता तक पहुंचाया है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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