रविवार, 9 अक्टूबर 2022

पुण्यकर्म से

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒पुण्यकर्म से.... ✍️🐒*

  *🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️ 1.कल कार्तिक कृष्ण एकम , 10 अक्टूबर 2022   सोमवार  को 14 वें तीर्थंकर 1008 श्री अनंतनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है। इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले 99.90% लोग उत्सव मनाकर जीवन सार्थक करते  है।🐒✍️*
*👨‍👩‍👧‍👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

🔔✍️ भगवानजी का बहुत प्यारा भक्त था जिसका नाम अवतार था..
वह छोले बेचने का काम करता था उसकी पत्नी रोज सुबह-सवेरे उठ छोले बनाने में उसकी मदद करती थी !

एक बार की बात है एक फकीर जिसके पास खोटे सिक्के थे उसको सारे बाजार में कोई वस्तु नहीं देता हैं तो वह अवतार के पास छोले लेने आता हैं !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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अवतार ने खोटा सिक्का देखकर भी उस फकीर को छोले दे दिए।ऐसे ही चार-पांच दिन उस फकीर ने अवतार को खोटे सिक्के देकर छोले ले लिए और उसके खोटे सिक्के चल गए !

जब सारे बाजार में अब यह बात फैल गयी की अवतार तो खोटे सिक्के भी चला लेता हैं..
पर अवतार लोगों की बात सुनकर कभी जवाब नहीं देता था । अपने भगवानजी को स्मरण करके  खुश रहते था !

एक दिन अवतार भगवानजी की भक्ति  कर उठे तो अपनी पत्नी से बोले - क्या छोले तैयार हो गए ?

पत्नी बोली - आज तो घर में हल्दी -मिर्च नहीं थी और मैं बाजार से लेने गयी तो सब दुकानदारों ने कहा कि--यह तो खोटे सिक्के हैं और उन्होंने सामान नहीं दिया !"

पत्नी के शब्द सुनकर  भगवानजी की याद में बैठ गए और बोले-"जैसी तेरी इच्छा मेरे स्वामी ! तुम्हारी लीला कौन जान सका हैं !

तभी आकाशवाणी हुई -" क्यों अवतार तू जानता नहीं था कि यह खोटे सिक्के हैं !"
अवतार बोला -" भगवानजी ,जी मै जानता था !"

भगवानजी  ने कहा -  फिर भी तूने खोटे सिक्के ले लिए ऐसा क्यूं किया भले मानुष !
अवतार बोला - हे दीनानाथ ! मैं भी तो खोटा सिक्का हूं इसलिए मैंने खोटा सिक्का ले लिया... कि जब मैं आपकी शरण मे आऊ तो तुम मुझे अपनी शरण से नकार ना दें !

क्योंकि आप तो खरे सिक्के ही लेते हो आप स्वयं सब जानते हो ! खोटे सिक्कों को भी आपकी शरण मे जगह मिल सकें !

थोड़ी देर में दूसरी आकाशवाणी हुई - हे भले मानुष ! तेरा भोला पन तेरा समर्पण स्वीकार है मुझे  । तू मेरा  खोटा सिक्का नहीं खरा सिक्का हैं !*

और उसके धनी मित्र का आना हुआ उसने अवतार की सारी व्यवस्था कर दी सदा के लिए। वह धनी मित्र कौन बन कर आया था ये आपके विवेक पर निर्भर है!!

जो भी कर्म करो भगवानजी बताते मार्ग के अनुसार उन्हें याद करते हुए समर्पित भाव से करते रहो फल के बारे मे मत सोचो आप देखना जिंदगी की गाड़ी कितनी तेज गति से दौड़ेगी पलटकर नही देखना पड़ेगा lऔर वह हमारे आस पास ही होगा किसी ना किसी रूप में या हर रूप में...
*🎪करने योग्य🔔*
*🔔➡️👪⏰जिस प्रकार अवतार ने एक फकीर की मदत की तो उसके पुण्यकर्म ने उसके व्यवस्था में मित्र को सहयोगी बनाया। उसी प्रकार हमें भी सभी जीवों की अपनी शक्तिनुसार यथायोग्य सहायता करते हुए अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहिए।हमारी आत्मा ने अनेकों भव तक प्रतिसमय असंख्यात पापकर्म किये है।उन पाप कर्मों को क्षय करने के लिए व हमें पाप कर्मों के प्रायश्चित के लिए जितना हो सके उतना पुण्यकर्म करते रहना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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