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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 पतन की सलाह ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️ कल कार्तिक अमावस्या 25 अक्टूबर 2022 मंगलवार प्रातः काल सूर्योदय से पहले चौबीसवें तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक 1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔3.आज के ही दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में , घरों में व अपने प्रतिष्ठानों में दीपोत्सव मनाया जाता है।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨👩👧👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*
▶️एक व्यक्ति ने अगरबत्ती की दुकान खोली, नाना प्रकार की अगरबत्तियां थीं। उसने दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया " *यहां सुगन्धित अगरबत्तियां मिलती हैं।"*
दुकान चल निकली! एक दिन एक ग्राहक उसके दुकान पर आया और कहा आपने जो बोर्ड लगा रखा है, उसमें एक विरोधाभास है! भला अगरबत्ती सुगंधित नहीं होंगी तो क्या दुर्गन्धित होंगी ?
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से करें।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
उसकी बात को उचित मानते हुए विक्रेता ने बोर्ड से सुगंधित शब्द मिटा दिया! अब बोर्ड इस प्रकार था " *यहां अगरबत्तियां मिलती हैं!"*
इसके कुछ दिनों के पश्चात किसी दूसरे सज्जन ने उससे कहा आपके बोर्ड पर "यहां" क्यों लिखा है ? दुकान जब यहीं है तब यहां लिखना निरर्थक है!
इस बात को भी अंगीकार कर विक्रेता ने बोर्ड पर यहां शब्द मिटा दिया! अब बोर्ड था " *अगरबत्तियां मिलती हैं !"*
पुनः उस व्यक्ति को एक रोचक परामर्श मिला अगरबत्तियां मिलती हैं का क्या प्रयोजन? अगरबत्ती लिखना ही पर्याप्त है! दूकान है तो मिलती ही हैं। अतः वह बोर्ड केवल एक शब्द के साथ रह गया
" *अगरबत्ती।*
विडम्बना देखिए! एक शिक्षक ग्राहक बन कर आएं और अपना ज्ञान वमन किया दुकान जब मात्र अगरबत्तियों की है तो इसका बोर्ड लगाने का क्या लाभ ? लोग तो देखकर ही समझ जायेंगे कि मात्र अगरबत्तियों की दुकान है! इस प्रकार वह बोर्ड ही वहां से हट गया!
कालांतर में दुकान की बिक्री मंद पड़ने लगी और विक्रेता चिंतित रहने लगा!
एक दिन में उसका पुराना मित्र उसके पास आया। अनेक वर्षों के उपरांत वे मिल रहे थे!
मित्र से उसकी चिंता ना छिप सकी और उसने इसका कारण पूछा तो व्यवसाय के गिरावट का पता चला!
मित्र ने सबकुछ ध्यान से देखा और कहा *तुम बिल्कुल ही मूर्ख हो! इतनी आवश्यक दुकान खोल ली और बाहर एक बोर्ड नहीं लगा सकते थे यहां सुगंधित अगरबत्तियां मिलती हैं !!!*
आपको जीवन में प्रत्येक पग पर सुझाव देने वाले मिलेंगे, जो उस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं परंतु लगेगा कि सारा विज्ञान, दर्शन शास्त्र, समाजशास्त्र इत्यादि उनमें ही अंतर्निहित है !
आप ऐसे व्यक्तियों की सुनेंगे या अनुपालन करेंगे तो आप के जीवन का बोर्ड भी गायब हो जाएगा। आपकी स्थिति भी उस विक्रेता की भांति हो जायेंगी!
*आप किसी भी समस्या या विषय के निराकरण के लिये उससे सम्बन्धित विशेषज्ञों की सुनेंगे या अपने अंतः चेतन की! क्योंकि आपको आपसे अधिक कोई नहीं जानता !!!*
*🕉️⏰🌞🔔↔️विशेष :-इस कहानी के माध्यम से आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि आज मुख्य धर्म की अनेक शाखाएं बन चुकी है।आज हमारी असफलता और पतन का कारण यह है कि हमने सत्य धर्म को छोड़कर लोगों के द्वारा बनाए गए मान्यता प्राप्त धर्म का अनुशरण कर रहे है।आज विश्व के सभी धर्म ग्रंथों का कहना है कि आप मेरी पूजा व मेरे नाम का गुणगान करते रहो तब आप सुखी रहोगे।आज विश्व का एकमात्र दिगंबर जैन धर्म है जो यह कहता व करता है कि आप तीर्थंकर के बताए हुए मार्ग पर चलिए एक दिन आप भी भगवान बन जाएंगे। अतः सभी से विनम्र निवेदन है कि आप सत्य धर्म को जानकर अपनी शक्तिनुसार अपने आचरण में रत्नत्रय का पालन कर जीवन सफल करें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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