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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 हमारे कर्मों का फल ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.कल प्रातः कार्तिक कृष्ण धन्य तेरस 23 अक्टूबर 2022 रविवार को छठे तीर्थंकर 1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव हैं।*
*✍️2.कार्तिक अमावस्या 25 अक्टूबर 2022 मंगलवार को चौबीसवें तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक 1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔3.इसी दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में व घरों में दीपोत्सव मनाया जाता है।*
*🕉️✍️ यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨👩👧👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*
एक बार शंकर जी पार्वती जी भ्रमण पर निकले। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक तालाब में कई बच्चे तैर रहे थे, लेकिन एक बच्चा उदास मुद्रा में बैठा था।
पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा, यह बच्चा उदास क्यों है? शंकर जी ने कहा, बच्चे को ध्यान से देखो।
पार्वती जी ने देखा, बच्चे के दोनों हाथ नही थे, जिस कारण वो तैर नही पा रहा था।
पार्वती जी ने शंकर जी से कहा कि आप शक्ति से इस बच्चे को हाथ दे दो ताकि वो भी तैर सके।
शंकर जी ने कहा, हम किसी के कर्म में हस्तक्षेप नही कर सकते हैं क्योंकि हर आत्मा अपने कर्मो के फल द्वारा ही अपना काम अदा करती है।
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पार्वती जी ने बार-बार विनती की। आखिकार शंकर जी ने उसे हाथ दे दिए। वह बच्चा भी पानी में तैरने लगा।
एक सप्ताह बाद शंकर जी पार्वती जी फिर वहां से गुजरे। इस बार मामला उल्टा था, सिर्फ वही बच्चा तैर रहा था और बाकी सब बच्चे बाहर थे।
पार्वती जी ने पूछा यह क्या है ? शंकर जी ने कहा, ध्यान से देखो।
देखा तो वह बच्चा दूसरे बच्चों को पानी में डुबो रहा था इसलिए सब बच्चे भाग रहे थे।
*👨👩👧👦🤝👩🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पूरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
शंकर जी ने जवाब दिया- हर व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार फल भोगता है। भगवान किसी के कर्मो के फेर में नही पड़ते हैं।
उसने पिछले जन्मो में हाथों द्वारा यही कार्य किया था इसलिए उसके हाथ नहीं थे।
हाथ देने से पुनः वह दूसरों की हानि करने लगा है। शंकरजी ने उसे अपनी शक्ति से पहले जैसा ही कर दिया।
इस कहानी में आपको उदाहरण के द्वारा समझाया जा रहा है। क्योंकि आज हर व्यक्ति किसी भी मूर्ती को भगवान मानकर उनसे अनेक प्रकार की उपलब्धियों की इच्छा रखता है।जब तक हमारे पुण्यकर्म का उदय नहीं होगा तब तक विश्व की कोई भी शक्ति हमारे लिए कुछ भी नहीं कर सकती। अतः हमें वह कर्म करना चाहिए जिससे किसी भी जीव को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो। भगवान महावीर स्वामी के जियो और जीने दो को जिसने भी अपने आचरण में उतार लिया वह कभी भी दुखी नहीं हो सकता।
*प्रकृति नियम के अनुसार चलती है, किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं।आत्माएं जब नित्य निगोद से आती हैं तब सब अपने ही कर्मों से चौरासी लाख योनियों में जन्म मरण होता हैं। कर्मों के अनुसार कोई रत्नत्रय को धारण कर कर्मों पर विजय प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त कर लेता है। कर्मो के कारण कोई अपाहिज है तो कोई भिखारी, तो कोई गरीब तो कोई अमीर लेकिन सब परिवर्तनशील हैं। अगर महलों में रहकर या पैसे के नशे में आज कोई बुरा काम करता है तो कल उसका भुगतान तो उसको करना ही पड़ेगा। ➡️हमारे द्वारा एक बार किया गया कर्म कितने बार फल देगा।इसे समझने के लिए आप एक आम के वृक्ष से समझ सकते है।आम का बीज एक बार बोया जाता है।वह लगभग पांच वर्षों में फल देना चालू कर देता है। कितने फल फूल बन कर झड़ जाते है, कुछ छोटे छोटे आम बनकर, कुछ बड़े होकर ओर कुछ पकने के बाद पेड़ से अलग हो जाते है।✍️एक व्यक्ति ने जहर खाया वह कुछ समय में ही मृत्यु को प्राप्त कर लेता है।इन दोनों उदाहरणों से यह समझ में आ गया कि कर्म तुरंत व अनेक बार फल दे सकते है। यदि कर्म का फल तुरंत भी मिलता है व नहीं भी मिलता तो इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गए। कर्मफल एक ऐसा अमिट तथ्य है कि जो आज नहीं तो कल भोगना पड़ेगा। यदि हमें अपने कर्मो का फल इस जीवन में नहीं मिलता अथवा बुरे कर्मो का फल हमें नहीं भुगतना पड़ता तो इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे कर्मों ने हमें क्षमा कर दिया। कार्य और कारण के नियम से न केवल प्रकृति बल्कि जड़ और चेतन जगत जिसमें मानव भी शामिल है, बंधा हुआ है। इससे कोई बच नहीं सकता । जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही फल प्राप्त हो यह अनिवार्य नहीं है हमारे वर्तमान के आचरण पर यह निर्भर करता है।हम अपने आचरण में रत्नत्रय को धारण किए हुए है तो वह कर्म हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ेगा हां शरीर को कुछ तकलीफ हो सकती है।वह कर्म हमारे आचरण में रत्नत्रय होने से उस कर्म को समाप्त करने की शक्ति से समाप्त हो जायेगा।*
_*कर्म तेरे अच्छे तो किस्मत तेरी दासी.....*_
_*नियत तेरी अच्छी तो घर मे सभी सुख और मन में शांति....*_
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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