गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

गांव के अनमोल संस्कार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒गांव के अनमोल संस्कार ✍️🐒*

गांव के स्कूल में पढ़ने वाली छुटकी आज बहुत खुश थी, उसका दाखिला शहर के एक आधुनिक सुविधाओं से युक्त  स्कूल में क्लास छठवीं में हो गया था।

आज स्कूल का पहला दिन था और वो समय से पहले ही तैयार हो कर स्कूल बस का इंतज़ार कर रही थी। स्कूल बस आई और छुटकी बड़े उत्साह के साथ उसमे सवार हो गयी।

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करीब एक घंटे बाद जब बस स्कूल पहुंची तो सारे बच्चे उतर कर अपनी-अपनी क्लास में जाने लगे…छुटकी भी बच्चों से पूछते हुए अपनी क्लास में पहुंची।

क्लास के बच्चे गांव से आई इस लडकी को देखकर उसका मजाक उड़ाने आगे।

“साइलेंस!”, टीचर बोली, “ चुप हो जाइए आप सब…”

“ये छुटकी है, और आज से ये आपके साथ ही पढ़ेगी।”

उसके बाद टीचर ने बच्चों को सरप्राइज टेस्ट के लिए तैयार होने को कह दिया।

“चलिए, अपनी-अपनी कॉपी निकालिए और जल्दी से “दुनिया के सात आश्चर्य लिख डालिए।”, टीचर ने निर्देश दिया।

सभी बच्चे जल्दी जल्दी उत्तर लिखने लगे, छुटकी भी धीरे-धीरे अपना उत्तर लिखने लगी।

जब सबने अपनी कॉपी जमा कर दी तब टीचर ने छुटकी से पूछा, “क्या हुआ बेटा, आपको जितना पता है उतना ही लिखिए, इन बच्चों को तो मैंने कुछ दिन पहले ही दुनिया के सात आश्चर्य बताये थे।”

“जी, मैं तो सोच रही थी कि इतनी सारी चीजें हैं…इनमे से कौन सी सात चीजें लिखूं….”, छुटकी टीचर को अपनी कॉपी थमाते हुए बोली।

टीचर ने सबकी कापियां जोर-जोर से पढनी शुरू कीं..ज्यादातर बच्चों ने अपने उत्तर सही दिए थे…

ताजमहल
चीचेन इट्ज़ा
क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा
कोलोसियम
चीन की विशाल दीवार
माचू पिच्चू
पेत्रा
टीचर खुश थीं कि बच्चों को उनका पढ़ाया याद था। बच्चे भी काफी उत्साहित थे और एक दुसरे को बधाई दे रहे थे…

अंत में टीचर ने छुटकी की कॉपी उठाई, और उसका उत्तर भी सबके सामने पढ़ना शुरू किया….

दुनिया के 7 आश्चर्य हैं:

1देख पाना
2सुन पाना
3किसी चीज को महसूस कर पाना
4हँस पाना
5प्रेम कर पाना
6सोच पाना
7दया कर पाना

छुटकी के उत्तर सुन पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। टीचर भी अवाक खड़ी थी….आज गांव से आई एक बच्ची ने उन सभी को प्रकृति के दिए उन अनमोल तोहफों को याद करा दिया था। जिनके तरफ उन्होंने कभी ध्यान ही नहीं दिया था!

सचमुच , गहराई से सोचा जाए तो हमारी ये देखने…सुनने…सोचने…समझने… जैसी शक्तियां किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं, ऐसे में ये सोच कर दुखी होने ने कि बजाएं कि हमारे पास क्या नहीं है हमें प्रकृति के दिए इन अनमोल तोहफों के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए और जीवन की छोटी-छोटी बातों में छिपी खुशियों को मिस नहीं करना चाहिए।

*विशेष:-आज भी गांव में अनपढ़ माता पिताओं से उनके बच्चों को ये नैतिक संस्कार जो वर्तमान समय में आधुनिक स्कूलों में नहीं पढ़ाए जाते।आज वर्तमान में  संस्कृति व संस्कारों को शिक्षा में महत्व नहीं दिया जा रहा है।बीस साल पहले ये सम्पूर्ण भारत में प्रत्येक घरों में उनके माता पिता व अन्य सदस्यों के द्वारा जब शिशु गर्भ में आता था तभी से संस्कार दिए जाते थे।आज के विज्ञान ने हमें उपकरणों  को उपलब्ध करवा कर आलसी व महा रोगी बना दिया है।इस कारण से सबेरे उठने के बाद रात्रि विश्राम तक हमें अनेक प्रकार की दवाओं का सहारा लेना पड़ता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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