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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒हमारी समस्याओं का रहस्य ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️कार्तिक अमावस्या 25 अक्टूबर 2022 मंगलवार को चौबीसवें तीर्थंकर , वर्तमान के शासन नायक 1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।➡️🔔3.इसी दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में व घरों में दीपोत्सव मनाया जाता है।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨👩👧👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*
😇↔️रोहित और मोहित बड़े शरारती बच्चे थे, दोनों पांचवीं कक्षा के छात्र थे और एक साथ ही स्कूल आया-जाया करते थे।
एक दिन जब स्कूल की छुट्टी हो गई तब मोहित ने रोहित से कहा, “ दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है?”
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“बताओ-बताओ…क्या आईडिया है?”, रोहित ने गंभीरता से पूछा।
मोहित- “वो देखो, सामने तीन बकरियां चर रही हैं।”
रोहित- “ तो! इनसे हमे क्या लेना-देना है?”
मोहित-” हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और जाने से पहले इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय व्यय करेगे और हमें पढाई नहीं करनी पड़ेगी…”
रोहित- “पर इतनी बड़ी बकरियां खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है, कुछ ही समय में ये मिल जायेंगी और फिर सबकुछ नार्मल हो जाएगा….”
मोहित- “हांहाहां…यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पायेंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूं!”
इसके बाद दोनों दोस्त छुट्टी के बाद भी पढ़ाई के बहाने अपने क्लास में बैठे रहे और जब सभी लोग चले गए तो ये तीनो बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आए।
अन्दर लाकर दोनों दोस्तों ने बकरियों के गले में एक गोल गत्ता बांध दिया। इसके बाद मोहित बोला, “अब मैं इन बकरियों पे नंबर डाल देता हूं।, और उसने काले रंग से नंबर लिखने शुरू किये-
पहली बकरी पे नंबर 1
दूसरी पे नंबर 2
और तीसरी पे नंबर 4
“ये क्या? तुमने तीसरी बकरी पे नंबर 4 क्यों डाल दिया?”, रोहित ने आश्चर्य से पूछा।
मोहित हंसते हुए बोला, “ दोस्त यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखना सभी तीसरे नंबर की बकरी ढूंढने में पूरा दिन निकाल देंगे…और वो कभी मिलेगी ही नहीं…”
अगले दिन दोनों दोस्त समय से कुछ पहले ही स्कूल पहुंच गए।
थोड़ी ही देर में स्कूल के अन्दर बकरियों के होने का शोर मच गया।
कोई चिल्ला रहा था, “ चार बकरियां हैं, पहले, दुसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गई…बस तीसरे नंबर वाली को ढूढना बाकी है।”
स्कूल का सारा स्टाफ तीसरे नंबर की बकरी ढूढने में लगा गया…एक-एक क्लास में टीचर गए अच्छे से तालाशी ली। कुछ खोजू वीर स्कूल की
छतों पर भी बकरी ढूंढते देखे गए… कई सीनियर बच्चों को भी इस काम में लगा दिया गया।
तीसरी बकरी ढूढने का बहुत प्रयास किया गया….पर बकरी तब तो मिलती जब वो होती…बकरी तो थी ही नहीं!
आज सभी परेशान थे पर रोहित और मोहित इतने खुश पहले कभी नहीं हुए थे। आज उन्होंने अपनी चालाकी से एक बकरी अदृश्य कर दी थी।
भव्य आत्माओं, इस कहानी को पढ़ कर चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर इस मुस्कान के साथ-साथ हमें इसमें छिपे सन्देश को भी जरूर समझना चाहिए। तीसरी बकरी, दरअसल वो चीजें हैं जिन्हें खोजने के लिए हम बेचैन हैं पर वो हमें कभी मिलती ही नहीं….क्योंकि वो हकीकत में होती ही नहीं!
हम ऐसी लाइफ चाहते हैं जो पूर्ण हो, जिसमे कोई समस्या ही ना हो….क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं!
हम ऐसा हम सफर चाहते हैं जो हमें पूरी तरह समझे जिसके साथ कभी हमारी अनबन ना हो….क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं!
हम ऐसी नौकरी या बिजनेस चाहते हैं, जिसमे हमेशा सबकुछ एकदम आराम से चलता रहे…क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं!
क्या जरूरी है कि हर वक्त किसी चीज के लिए परेशान रहा जाए? ये भी तो हो सकता है कि हमारे जीवन में जो कुछ भी है वही हमारे जीवन की पहेली को हल करने के लिए पर्याप्त हो….ये भी तो हो सकता है कि जिस तीसरी चीज की हम तलाश कर रहे हैं वो हकीकत में ना हो….और हम पहले से ही परिपूर्ण हों! किंतु हमने अपने नकारात्मक विचारों से अपने मन मंदिर में अनेक प्रकार के पहाड़ खड़े कर लिए है।
*🔔⏰🎪😇↔️विशेष :- हम वहीं सोचें जो हमारे प्रयासों के द्वारा किया जा सकता है। अन्य को देखकर उसे प्राप्त करने की इच्छा ना करें। हां हमें हमेशा सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्तव्य करते रहना है। यही हमारी सफलता का रहस्य है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजीए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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