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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 संघर्ष से सुरक्षा ✍️🐒*
एक पांच साल का लड़की सपना गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास गाँव घूमने आई। एक दिन वो बड़ी खुश थी, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंची और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तब मैं बहुत सफल नागरिक बनुंगी। क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते हैं?”
दादा जी ने ‘हां’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे लड़की का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला में ले गए।
वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे नीम के पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से करें।✍️*
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वापस लौट कर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया।
“क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”, दादा जी ने लड़की से पूछा।
लड़की कुछ क्षणों तक सोचती रही और फिर बोली, ” घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है जबकि बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है…”
दादाजी बोले, ” चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, और वह अखबार उठा कर पढने लगे।
कुछ दिन बाद छूट्टियाँ समाप्त हो गई और वो लड़की वापस शहर चली गई।
इस बीच दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। 4 साल बाद एक बार फिर वो अपने माता-पिता के साथ गांव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे सफल नागरिक होने के कुछ सुझाव मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा।”
दादा जी मुस्कुराये और लड़की को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था।
*बच्ची ने दादाजी से पूछा आपने नीम के ही पौधे क्यों लगायें । दादाजी ने कहा कि नीम के पेड़ से मिलकर आने वाली हवा हमें अनेक रोगों से बचाती है। नीम के पेड़ की छांव , पत्ती, फूल, फल,छाल व लकड़ी सभी में अनेक औषधीय गुणों के कारण यह पौधे लगाए है।*
अब वह पौधा एक खूबसूरत पेड़ में बदल चुका था।
लड़की बोली, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा…”
“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़की को बाहर ले गए।
बाहर एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े राहगीर आराम से बातें कर रहे थे।
“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”, दादा जी ने पूछा।
“…ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी…”, लड़की आश्चर्य से बोली।
*🔔⏰🪜😇↔️विशेष:-दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन संघर्ष स्वीकार करने के अपने उपहार भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, आपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर सुरक्षित जीवन पसन्द करते हो तो तुम कभी भी उतना नहीं बढ़ पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम संघर्षों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है! लड़की ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगी…वो दादाजी की बात समझ चुकी थी, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था! बिना संघर्ष व मेहनत के हम कुछ भी नहीं कर सकते । अतः हमें योग्य गुरु के मार्गदर्शन में स्वशक्ती को जागृत कर अपनें लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।*
*🕉️🐒✍️भव्य आत्माओं हमारे पूर्वो पार्जित कर्मों ने हमें एक अर्थ पूर्ण जिंदगी जीने के लिए बनाया है। लेकिन दुर्भाग्य से अधिकतर लोग डर-डर के जीते हैं और कभी भी अपने कर्तव्य को महसूस नही कर पाते। इस बेकार के डर को पीछे छोड़िए…जिन्दगी जीने का असली जीवन तभी है जब आप वो सब कुछ कर पाएं जो सब कुछ आप कर सकते हैं…वरना दो वक्त की रोटी की व्यवस्था तो पशु पक्षी भी कर लेते है…इसलिए हर समय सुरक्षित रहने केलिए हमें अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। अन्य शार्टकट व लुभावने चक्कर में मत जाओ …जोखिम से बचिए। उस विशाल वृक्ष की तरह संघर्ष करते हुए अपनी जड़ों को मजबूत कर जिंदगी को सुंदर बनाइये!*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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