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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒मेरा मिथ्यात्व ✍️🐒*
एक बार की बात है। एक महात्मा अपने शिष्य के साथ एक गांव से गुजर रहे थे। दोनों को बहुत भूख लगी थी। पास में ही एक घर था।
दोनों घर के पास पहुंचे और दरवाजा खटखटाया। अंदर से फटे-पुराने कपड़े पहना एक आदमी निकला।
महात्मा ने उससे कहा- हमें बहुत भूख लगी है। कुछ खाने को मिल सकता है क्या?
उस आदमी ने उन दोनों को खाना खिलाया।
खाना खाने के बाद महात्मा ने कहा...
तुम्हारी जमीन बहुत उपजाऊ लग रही है, लेकिन फसलों को देखकर लगता है कि तुम खेत पर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते। फिर तुम्हारा गुजारा कैसे होता है?
आदमी ने उत्तर दिया- हमारे पास एक भैंस है, जो काफी दूध देती है। उससे मेरा गुजारा हो जाता है।
रात होने लगी थी, इसलिए महात्मा शिष्य सहित वहीँ रुक गए।
रात को उस महात्मा ने अपने शिष्य को उठाया और कहा- चलो हमें अभी ही यहां से निकलना होगा और इसकी भैंस भी हम साथ ले चलेंगे।
शिष्य को गुरु की बात अच्छी नहीं लगी, लेकिन करता क्या! दोनों भैंस को साथ लेकर चुपचाप निकल गए।
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यह बात उस शिष्य के मन में खटकती रही।
कुछ सालों बाद एक दिन शिष्य उस आदमी से मिलने का मन बनाकर उसके गांव पहुंचा।
जब शिष्य उस खेत के पास पहुंचा, तो देखा खाली पड़े खेत अब फलों के बगीचों में बदल चुके थे।
उसे यकीन नहीं आ रहा था, तभी वह आदमी सामने दिख गया।
शिष्य उसके पास जाकर बोला- सालों पहले मैं अपने गुरु के साथ आपसे मिला था।
आदमी ने शिष्य को आदर पूर्वक बिठाया और बताने लगा... उस दिन मेरी भैंस खो गई। पहले तो समझ में नहीं आया कि क्या करूं।
फिर, जंगल से लकड़ियां काटकर उन्हें बाजार में बचने लगा। उससे कुछ पैसे मिले, तो मैंने बीज खरीद कर खेतो में बो दिए।
उस साल फसल भी अच्छी हो गई। उससे जो पैसे मिले उन्हें मैंने फलों के बगीचे लगाने में इस्तेमाल किया।
अब काम बहुत ही अच्छा चल रहा है। और इस समय मैं इस इलाके में फलों का सबसे बड़ा व्यापारी हूं। अब मेरे यहां गांव के सौ आदमी मजदूरी भी करते है।
कभी-कभी सोचता हूं उस रात मेरी भैंस न खोती तो यह सब न होता।
शिष्य ने उससे पूछा, यह काम आप पहले भी तो कर सकते थे?
तब वह बोला, उस समय मेरी जिंदगी बिना मेहनत के चल रही थी। मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं इतना कुछ कर सकता हूं।
*🕉️👣🔐⏰🎪विशेष:-भव्य आत्माओं, अगर आपके जीवन में भी तो कोई ऐसी मिथ्या धारणा रूपी भैंस है, जो आपको बड़ा बनने से रोक रही है, तो उसे आज ही छोड़ दें। यह करना बहुत ही मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। आज हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है मिथ्यात्व (गलत जानकारी) इसके कारण हम कार्य करते हुए भी कुछ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।इस मिथ्या दर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए आप जैन धर्म के सच्चे देव शास्त्र गुरु या गूगल बाबा ओर यूट्यूब का सहारा ले सकते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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