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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒हार से मिली खुशी ✍️🐒*
आज मां की बात पर यकीन हो गया कि हार में जीत छुपी होती है। अभी तक तो सिर्फ फिल्मों में ही सुनते आ रहे थे, मगर आज यह सच सामने था। इससे पहले मैंने राजीव को कभी हारते हुए नहीं देखा था। जीतना तो जैसे उसकी आदत सी बन गई थी। पूरे रामनगर और काशीपुर में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो राजीव को दौड में हरा सके, इसीलिए तो सभी उसे दूसरा बोल्ट कहते थे। अक्सर लोग कहा भी करते थे कि यह लड़का दौड़ प्रतियोगिता जीतने के लिए ही बना है।
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उस दिन राजीव की हार ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। कोई नहीं समझ पा रहा था कि यह कैसे और क्यों हुआ?
सभी अपनी-अपनी टिप्पणियां दे रहे थे। उसकी हार एक बड़ी चर्चा का विषय थी। जिन्होंने यह बात सिर्फ सुनी थी, वे तो इसे मानने को ही तैयार नहीं थे कि ऐसा भी हो सकता है। ऐसा होना स्वाभाविक भी था क्योंकि राजीव हमारा बचपन का दोस्त था। हम लोगों के बीच कभी कोई राज छुपा नहीं रहता था। वह मेरी हर छोटी से बड़ी बात जानता था और मैं उसकी, लेकिन इस बार राजीव ने मुझे उस पर शक करने पर मजबूर कर दिया था। उसने हमारी सालों की दोस्ती पर सवाल खड़े कर दिए थे। मेरा विश्वास टूटने लगा था कि आखिर ऐसा क्या है कि राजीव हमें हार की वजह नहीं बता रहा है।
दो दिन बाद जब राजीव मुझसे मिलने घर पर आया तो मैंने उससे बात करने से इंकार कर दिया। उसने मुझे समझाने के काफी प्रयास किए लेकिन मैं कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। आखिरकार राजीव को अपनी चुप्पी तोडऩी पड़ी। उसने बताया कि जब वह दौड़ के लिए तैयार हो रहा था तो उसने एक लड़के को अपनी बहन से बात करते हुए सुन लिया था। उसकी बहन अति विश्वास के साथ कह रही थी कि "किसी भी हाल में तुम्हें यह दौड़ जीतनी ही है , तभी तुम इससे मिलने वाली धनराशि से अम्मी का इलाज करा सकोगे "। वह लड़का भी मां के इलाज के लिए हर हाल में दौड़ जीतना चाहता था।
इसीलिए मैंने दौड़ के अंत में उस लड़के को अपने समीप आने दिया और फिर मैं रुक गया ताकि वह जीत जाए। मैं चाहता तो खुद यह दौड़ जीत लेता और जीती हुई धनराशि उसे दे देता, मगर इससे उस लड़के के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती और शायद वह धनराशि लेने से भी इंकार कर देता।
इसीलिए मैं इस प्रतियोगिता में हार गया।
राजीव की बातें सुनकर मुझे बहुत शर्म आई कि मैंने मित्रता पर ही सवाल खड़ा कर दिया और वह भी एक प्रतियोगिता में हार की वजह से। शर्मिंदगी के चलते मैंने राजीव से क्षमा मांगी। उसने मुझे समझाया कि दोस्ती में कभी-कभी ऐसा भी होता है। राजीव के इस नेक कार्य से मैंने एक बात सीखी कि वाकई में हार कर भी जीत हासिल की जा सकती है और इस जीत की खुशी दोहरी होती है। जानकर भी अगर राजीव यह प्रतियोगिता जीत जाता तो शायद वह लड़का अपनी मां के इलाज के लिए धनराशि नहीं जुटा पाता और उसके सपने अधूरे ही रह जाते। राजीव की हार ने यह भी संदेश दिया कि हम भारतीय धर्म-जाति की बंदिशों से ऊपर उठकर सोचते हैं। _*तभी तो हमारे देश को अनेकता में एकता वाला देश कहा जाता है।*_
*विशेष:-भव्य आत्माओं, हमें अपने जीवन में कुछ विशेष अवसरों पर जिती हुई बाजी भी हारना चाहिए।इस कार्य से किसी भी जीव की हिंसा ना हो तथा स्वयं का समाज का पतन ना हो यह बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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