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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अनोखी मांग ✍️🐒*
एक धनवान पिता ने अदालत में दाखिल किया अपने बेटे पर महत्वपूर्ण केस ।ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।
जज साहब ने पूछा,आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है।बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्चा मांगना चाहता हूं।
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जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है।
इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है।आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए।
बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है। लेकिन फिर भी मुझे हर महीने, अपने बेटे से बहुत कुछ लेना चाहता हूं।
वो चाहे कुछ भी हो, कुछ समय ही क्यों न हो।
जज साहब आश्चर्यचकित होकर,
बाप से कहने लगा,
आप इतने मालदार हो,
तो आपको बेटे से क्या आवश्यकता है।
बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा,
की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे।तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा।
जब बेटा अदालत में आया,तो जज साहब ने बेटे से कहा की आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं, चाहे वह कम क्यों न हो।
बेटा भी जज साहब की बात सुनकर,आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा कि मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पैसे की भला क्या जरूरत है।
जज साहब ने कहा,यह आपके पिता की मांग है और वह अपने में स्वतंत्र है।पिता ने जज साहब से कहा की आप मेरे बेटे से कहिए की वह मेरे साथ हर महीने एक समय घर पर भोजन करें व तीन महिने में एक बार एक दिन हमारे साथ सपरिवार धार्मिक स्थल पर बिताए। इन दोनों कार्यों में बिल्कुल भी देरी न करेगा व किस दिन क्या कार्य होगा इसके लिए वह स्वतंत्र रहेगा।
फिर जज साहब ने बूढ़े आदमी के बेटे से कहा की तुम हर महीने एक समय साथ में भोजन करोगे और तीन महिने में एक दिन दिगंबर मंदिर या जैन क्षेत्र पर सपरिवार भगवान के भजन कीर्तन में सहयोगी बनोगे।
ये आपको अदालत हुक्म देती है।
मुकदमा खत्म होने के बाद,
जज साहब बूढ़े आदमी को अपने पास बुलाते हैं।
उन्होंने बूढ़े आदमी से पूछा की, अगर आप बुरा न मानें, तो मैं आप से एक बात पूछूंगा।
आपने बेटे के खिलाफ यह मुकदमा क्यों किया, आप तो बहुत अमीर आदमी हो और ये इतनी छोटी सी आवश्यकता।
बूढ़े आदमी ने रोते हुए कहा:जज साहब मैं अपने बेटे का चेहरा देखने के लिए तरस गया था। वह अपने कामों में इतना व्यस्त रहता है कि एक जमाना गुजर गया, उससे मिला नहीं और ना ही बात हुई, ना आमने सामने और न फोन पर।
मुझे अपने बेटे से बहुत चाहत है, इसलिए मैंने उस पर ये मुकदमा किया था, ताकि हर महीने मैं उसके साथ भोजन कर सकूं और मैं उसको देख कर खुश हो लिया करूंगा।ये बात सुनकर जज की भी आंखों में आंसू आ गए।
जज साहब ने बूढ़े आदमी से कहा की अगर आप पहले बताते, तो मैं उसको नज़रअंदाज और ख्याल न रखने के जुल्म में सजा करा देता।
*बूढ़े बाप ने जज साहब की तरफ मुस्कराते हुए देखा, और कहा अगर आप सजा कराते, तो मेरे लिए ये दुख की बात होती, क्योंकि सच में उससे मैं बहुत प्यार करता हूं और मैं हरगिज नहीं चाहूंगा कि मेरी वजह से मेरे बेटे को कोई सजा मिले या उसे कोई तकलीफ हो। मैंने यह दोनों शर्त इसलिए रखीं की उसके भी चार पुत्र है मैंने जो अनुभव किया उसपर वह समय ना आवे।*
*⏰👪🎪🔔🔑विशेष:-भव्य आत्माओं,इस कहानी से ये प्रेरणा मिलती है, मां बाप को आपके पैसे की जरूरत नहीं है, उनको आपके समय की जरूरत है। वक्त के रहते उनसे रोज बातें कर लिया करो। आपका कुछ नहीं जाएगा, परंतु आपको अपने माँ बाप का आशीर्वाद जरूर प्राप्त होगा। वरना एक दिन याद करके पछताने के अतिरिक्त कुछ शेष नहीं होगा। अतः आप अपने माता पिता का ध्यान अवश्य ही रखें। अन्यथा वहीं कर्म आपके आयु के अंतिम समय में आपसे बहुत कुछ कहेगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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