रविवार, 25 दिसंबर 2022

आशीर्वचन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आशीर्वचन ✍️🐒*

एक समय आदरणीय गुरु नानक देव यात्रा करते हुए नास्तिक विचारधारा रखने वाले लोगों के गांव पहुंचे। वहां बसे लोगों नें गुरु नानाक देव और उनके शिष्यों का आदर
सत्कार नहीं किया, उन्हें कटु वचन बोले और तिरस्कार किया. इतना सब होने के बाद भी, जाते समय ठिठोली लेते हुए, उन्होंने गुरु नानक देव से आशीर्वचन देने को कहा।

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जिस पर नानक देव नें मुस्कुराते हुए कहा “आबाद रहो”

भ्रमण करते हुए, कुछ समय बाद गुरु नानक और उनके शिष्य एक दूसरे गांव जा पहुंचे। इस गांव के लोग नेक, दयालु और प्रभु में आस्था रखने वाले थे।

उन्होंने बड़े भाव से सभी का स्वागत सत्कार किया और जाते समय गुरु नानक देव से आशीर्वचन देने की प्रार्थना की। तब गुरु नानक देव नें कहा “उजड़ जाओ\” इतना बोल कर वह आगे बढ़ गए. तब उनके शिष्य भी गुरु के पीछे पीछे चलने लगे।

आगे चल कर उनमें से एक शिष्य खुद को रोक नहीं सका और बोला। हे ‘गुरुदेव’ आपनें तिरस्कार करने वाले उद्दंड मनुष्यों को आबाद रहने का आशीर्वचन दिया और सदाचारी
शालीन लोगों को उजड़ जाने का कठोर आशीर्वचन क्यों दिया?

तब गुरु नानक देव हँसते हुए बोले-

सज्जन लोग उजड़ने पर जहाँ भी जायेंगे वहां अपनी सज्जनता से उत्तम वातावरण का निर्माण करेंगे। परंतु दुष्ट और दुर्जन व्यक्ति जहाँ विचरण करेगा वहां, अपने आचार-विचार से वातावरण दूषित करेगा। इस प्रयोजन से मैंने उन्हें वही आबाद रहने का आशीर्वचन दिया।

अपने गुरु की ऐसी तर्कपूर्ण बात से वह शिष्य संतुष्ट हुआ और वह सब अपने मार्ग पर आगे बढ़ गए।

*👪⏰👣🪜✍️विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,, आज भी हम लोगों के साथ साधु संतो या घर के बड़े बुजुर्गो के द्वारा आशीर्वचन में कुछ उल्टे शब्दों का दिशानिर्देश मिल जाता है। इससे आप बिल्कुल भी विचलित ना हो, उनसे उनके द्वारा कहे गये शब्दों का अभिप्राय समझने का प्रयास करें ताकि आपका सर्वांगीण विकास हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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