गुरुवार, 1 दिसंबर 2022

शिकायत या समाधान

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒शिकायत या समाधान ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी दिनांक 2 दिसंबर  2022     शुक्रवार  को अठारवे तीर्थंकर अरनाथ सभी के मोक्ष प्रदाता 1008 श्री  अरनाथ भगवान जी का तप कल्याणक  महोत्सव हैं। तीर्थंकर अरनाथ जी का है तप कल्याणक हस्तिनापुर में हुआ था | बादलों का नष्ट होना देखकर , वैराग्य हुआ , दो दिन के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर रेवती नक्षत्र में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की |*
*आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सार्थक करें।*

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*🔔2. मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी  3 दिसंबर  2022     शनिवार  को 19 वें तीर्थंकर 1008 श्री   मल्लिनाथ    भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक व 21 वें तीर्थंकर 1008 श्री  नमिनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

▶️ कुछ समय पहले की बात है जंगल के करीब एक गाँव में दुखिया और सुखिया नाम के दो लकड़हारे रहते थे। एक सुबह जब वे जंगल में लकड़ियाँ काटने गए तो उनकी आँखे फटी की फटी रह गयी।

लकड़ी की तस्करी करने वाली गैंग ने बहुत सारे पेड़ काट दिए थे और बड़े-बड़े ट्रक्स में लकड़ियाँ भर ले गए थे।

ये देखते ही दुखिया क्रोधित हो गया, “देख सुखिया क्या किया उन तस्करों ने… मैं उन्हें छोडूंगा नहीं…. मैं गाँव के हर घर जाऊँगा और इस घटना की शिकायत करूँगा… क्या तुम भी मेरे साथ चलोगे…”

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“तुम चलो मैं बाद में आता हूँ.”, सुखिया बोला।

“बाद में आता हूँ....? क्या मतलब है तुम्हारा इतनी बड़ी घटना हो गयी और तुम हाथ पे हाथ धरे बैठे रहोगे… चल के सबको इसके बारे में बताओगे नहीं?”, दुखिया हैरान होते हुए बोला।

“जो मन करे वो करो.. मैं तो चला…”

और फ़ौरन दुखिया गाँव के प्रधान के पास जा कर बोला, “आप यकीन करेंगे उन दुष्टों ने रातों-रात सैकड़ों पेड़ काट डाले… मैं कुछ नहीं जानता उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए….किसी भी तरह से उनका पता लगाइए और उन्हें पुलिस के हवाले करिए…”

और इसके बाद दुखिया घर-घर जाकर यही बात बताने लगा और साथ में सुखिया की भी शिकायत करने लगा कि इतना कुछ हो जाने पर भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा और वो इसके लिए कुछ भी नहीं कर रहा है।

गाँव वाले भी क्या करते उसके बात सुनते और ढांढस बंधा कर अपने-अपने काम में लग जाते।

ये सब करते-करते शाम हो गयी और दुखिया अपने घर लौट आया।

अगली सुबह वह फिर से सुखिया के पास गया और कहा, “आज मैं इस घटना की शिकायत करने कोतवाली जा रहा हूँ…क्या तुम नहीं चलोगे?”

“मैं चलना तो चाहता हूँ पर क्या हम दोपहर को नहीं चल सकते?”, सुखिया बोला।

“समझ गया… तुम टाल-मटोल कर रहे हो मैं अकेले ही चला जाता हूँ…”, और दुखिया गुस्से में वहां से निकल गया।

अगली सुबह दुखिया के दिमाग में आया कि इस घटना को लेकर गांधी चौक पर धरना दिया जाए…. और वह अपनी योजना लेकर सुखिया के घर पहंचा।

“खट-खट खट-खट”, दुखिया ने सुखिया को आवाज़ देते हुए दरवाजा खटखटाया।

“बापू जंगल गए हैं!”, अंदर से आवाज़ आई।

दुखिया मन ही मन सोचने लगा कि ये सुखिया भी कितना पागल है… अब जब हमारे मतलब के पेड़ ही नहीं रहे तो वो जंगल में क्या करने गया है!

वह फ़ौरन सुखिया को बुलाने के लिए जंगल की ओर बढ़ गया।

वहां पहुँच कर उसने देखा कि सुखिया उस जगह को साफ़ कर उसमे नए पेड़ लगा रहा है।

दुखिया बोला, “ये क्या कर रहे हो? अभी बहुत से लोगों को इस घटना के बारे में पता नहीं चला है…. और तुम यहाँ नए पेड़ लगाने में समय बर्बाद कर रहे हो… क्यों कर रहे हो ऐसा?”

“क्योंकि बस शिकायत करने से पेड़ वापस नहीं आ जायेंगे!”, सुखिया बोला।

 कुछ बुरा होने के बाद जो काम सबसे आसान होता है वो है शिकायत करना और शायद इसीलिए हर कोई इस आसान काम को करने में ही लगा रहता है। कुछ हद तक ऐसा करना प्राकृतिक भी लगता है पर समस्या ये है कि हम बस यही करने में अपनी पूरी ऊर्जा… अपना पूरा ध्यान लगा देते हैं…हम ये नहीं सोचते की जो समस्या पैदा हुई है उसके समाधान में हम खुद क्या कर सकते है...

*🔔🐒🔊👨‍👩‍👦‍👦💡विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी के जीवन में अनेक प्रकार की कुछ अनहोनी अनावश्यक घटनाएं हो रही है।हमारा प्रयास ऐसा होना चाहिए कि उन घटनाओं पर अंकुश लगने के साथ जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए भी सकारात्मक प्रयास किया जाना चाहिए।ऐसा करने से हमारा, समाज, राष्ट्र आदि का विकास संभव है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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