शनिवार, 29 अप्रैल 2023

कर्म फल

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*कर्म फल*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्म फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल बारस दिनांक 2 मई  मंगलवार कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर  वर्धमान स्वामीजी का केवलज्ञान  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 02,11,14,16,18,19, 23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक महिला बहुत ही धार्मिक थी और उसने नाम दान भी लिया हुआ था और बहुत ज्यादा भजन सिमरन और सेवा भी करती थी। किसी को कभी गलत न बोलना, सब से प्रेम से मिलकर रहना उसकी आदत बन चुकी थी। वो सिर्फ एक चीज़ से दुःखी थी कि उसका आदमी उसको रोज़ किसी न किसी बात पर लड़ाई झगड़ा करता। उस आदमी ने उसे कई बार इतना मारा की उसकी हड्डी भी टूट गई थी। लेकिन उस आदमी का रोज़ का काम था- झगड़ा करना। उस महिला ने अपने गुरु महाराज जी से अरज की- हे  पातशाह मेरे से कौन भूल हो गई है। मै सत्संग भी जाती हूं, सेवा भी करती हूं। भजन सिमरन भी आप के हुक्म के अनुसार करती हूं। लेकिन मेरा आदमी मुझे रोज़ मारता है। मैं क्या करुं। 

गुरु महाराज जी ने कहा क्या वो तुझे रोटी देता है। बीबी ने कहा हां जी देता है। गुरु महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। कोई बात नहीं। उस बीबी ने सोचा अब शायद गुरु की कोई दया मेहर हो जाए और वो उसको मारना पीटना छोड़ दे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उसकी तो आदत बन गई थी रोज़ अपनी घरवाली की पिटाई करना।

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कुछ साल और निकल गए उसने फिर महाराज जी से कहा की मेरा आदमी मुझे रोज़ पीटता है। मेरा कसूर क्या है। गुरु महाराज जी ने फिर कहा क्या वो तुम्हें रोटी देता है। उस बीबी ने कहा हां जी देता है। तो महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। तुम अपने घर जाओ। बीबी बहुत निराश हुई कि महाराज जी ने कहा ठीक है। वो घर आ गई लेकिन उसके पति के स्वभाव वैसे का वैसा रहा। वह रोज़ लड़ाई झगड़ा करते रहा। वो महिला बहुत तंग आ गई।

कुछ एक साल गुज़रे फिर गुरु महाराज जी के पास गई कि वो मुझे अभी भी मारता है। मेरी हाथ की हड्डी भी टूट गई है। मेरा कसूर क्या है। मैं सेवा भी करती हूँ। सिमरन भी करती हूँ। फिर भी मुझे जिंदगी में सुख क्यों नहीं मिल रहा। गुरु महाराज जी ने फिर कहा वो तुझे रोटी देता है। उसने कहा हां जी देता है। महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। फिर इस बार वो महिला जोर जोर से रोने लगी और बोली की महाराज जी मुझे मेरा कसूर तो बता दो। मैंने कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। महाराज कुछ देर शांत हुए और फिर बोले बीबी तेरा पति पिछले जन्म में तेरा बेटा था। तू उसकी सौतेली मां थी। तू रोज़ उसको सुबह शाम मारती रहती थी। और उसको कई कई दिन तक भूखा रखती थी। शुक्र मना के इस जन्म में वो तुझे रोटी तो दे रहा है। ये बात सुन कर बीबी एक दम चुप हो गई। गुरु महाराज जी ने कहा बेटा जो कर्म तुमने किए हैं, उस का भुगतान तो तुम्हें अवश्य करना ही पड़ेगा। फिर उस महिला ने कभी महाराज से शिकायत नहीं की, क्योंकि वो सच को जान गई थी। 

हमें भी कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। सब से प्रेम प्यार के साथ रहना चाहिए। हमारी जिन्दगी में जो कुछ भी हो रहा है, सब हमारे कर्मों का लेखा जोखा है। जिसका हिसाब किताब तो हमें देना ही पड़ेगा।

*🎪🔔✍️🔑👪विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं,जिस प्रकार के कर्म हम चौबीस घंटों में मन-वचन व शरीर के द्वारा करते है।उसी कर्मो के अनुसार हमारा भविष्य निर्धारित होता है। अतः हम जिस प्रकार का सुख चाहते है उसी प्रकार का हमें कर्म वर्तमान में करना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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