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*नियम पालने का फल*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒नियम पालने का फल ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी दिनांक 29 अप्रैल शनिवार पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ भगवानजी का तप कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
एक दिगबंर संत थे। वे एक दिन एक गांव में विहार कर पहुंचे। वह संघ सहित जाट के घर पर कुछ समय के लिए रुके थे । जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। सन्त ने उसे कहा कि रोजाना रामनाम -जप करने का कुछ नियम ले लो।
जाट ने कहा बाबा, हमारे को वक्त नहीं मिलता। सन्त ने कहा कि अच्छा, रोजाना मंदिर जी के दर्शन कर आया करो।
जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूं और मंदिर जी तो गांव में है, कैसे करूँ? संत ने उसे कई साधन बताये, कि वह कुछ -न-कुछ नियम ले लें।
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पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं, मैं खेत में काम करूँ या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है?
बाल -बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके आशीर्वाद से सबकुछ प्राप्त हो यही प्रार्थना आप सभी से करता हूं।
संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है? जाट बोला कि पडोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी आस -पास है।
और घर भी पास -पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूंगा। सन्त ने कहा कि ठीक है। उसको देखे बिना भोजन मत करना।
जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो तो वह चट बाड पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता और भोजन कर लेता।
इस नियम में वह पक्का रहा। एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया।
उसने बाड़ पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दिखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहां मर गया, कम से कम देख तो लेता।
अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते -खोदते एक हांडी मिल गई। जिसमें तरह -तरह के रत्न, अशर्फियाँ भरी हुई थी।
उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया।
कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हांडी देख ली और अब वह आफत पैदा करेगा।
कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया, देख लिया।
कुम्हार बोला कि अच्छा, देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा, पर किसी से कहना मत। जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया।
उसके मन में विचार आया कि दिगंबर संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करू तो कितना लाभ होगा।
ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए।
तात्पर्य यह है कि हम दृढता से अपना एक उद्देश्य बना लें, नियम ले लें कि चाहे जो हो जाये, हमें तो भगवान् की तरफ चलना है।
भगवान् का भजन करना है। नियम बनाने की अपेक्षा नियम को पहचाने। नियम क्यों लिया गया है।
अगर हमें हमेशा यह स्मरण रहे कि हमने जो नियम लिया है वह क्यों लिया है तो शायद नियम कभी न छूटे..!!
*🔔✍️⏰⛳▶️विशेष :- भव्य आत्माओं , आज हमने कोई भी नियम दृढ़ता पूर्वक पालन नहीं किया।जब हमारी इच्छा होती है धर्म कार्य कर लेते है। हमें अपने प्राचीन शास्त्रों के अनुसार अपना आचरण करना चाहिए। अन्यथा हम सभी अनादि काल तक चौरासी लाख योनियों के सुख भोगते रहेंगे। हमारी आत्मा का परमात्मा से मिलन नहीं होगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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