रविवार, 9 अप्रैल 2023

बुढ़ापे का सहारा कौन ?

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*बुढ़ापे का सहारा कौन ?*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बुढ़ापे का सहारा कौन ? ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली   14, 15, 19, 21, 26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली  03,06, 08, 14, 15,19,21,26,28,29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

 *बुढ़ापे का सहारा कौन??? बेटा या*बेटी??*

*हम सभी लोग मेन हॉल में बैठे-बैठे चर्चाएं कर रहे थे तभी मेरी बहन ने मुझसे एक प्रश्न पूछा कि "भैया! यह बताओ आदमी के बुढ़ापे का सहारा उसकी बेटी होती है या उसका बेटा?*

   *मैंने कहा- "बहन! यह प्रश्न ना करो तो ही अच्छा है। क्योंकि इससे कोई तो खुश होगा किसी को दुख होगा।* 

   *तो अन्य सभी लोग जिद करने लगे नहीं नहीं यह बात तो बतानी ही पड़ेगी वह भी विस्तार से...*

मैने कहा तो फिर सुनो...  *बुढापे का सहारा बेटा या बेटी नहीं "बहू" होती हैं।* 

जैसा कि लोगों से अक्सर सुनते आये हैं कि बेटा या बेटी बुढ़ापे की लाठी होती है इसलिये लोग अपने जीवन मे एक *"बेटा एवं बेटी"* की कामना ज़रूर रखते हैं ताकि बुढ़ापा अच्छे से कटे।

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ये बात सच भी है *क्योंकि बेटा ही घर में बहु लाता है।* बहु के आ जाने के बाद एक बेटा अपनी लगभग सारी जिम्मेदारी अपनी पत्नी के कंधे पर डाल देता है।
और *फिर बहु बन जाती है अपने बूढ़े सास-ससुर की बुढ़ापे की लाठी ।* 

जी हाँ! मेरा तो यही मानना है वो बहु ही होती है जिसके सहारे बूढ़े सास-ससुर अपना जीवन अच्छे से व्यतीत करते हैं।

*एक बहु को अपने सास-ससुर की पूरी दिनचर्या मालूम होती है।*
कौन कब और कैसी चाय पीते है , क्या खाना बनाना है , शाम में नाश्ता में क्या देना , रात को हर हालत में 9 बजे से पहले खाना बनाना है । 
अगर सास-ससुर बीमार पड़ जाए तो पूरे मन या बेमन से बहु ही देखभाल करती है।

अगर एक दिन के लिये बहु बीमार पड़ जाए या फिर कही चली जाएं , तो पूरे घर की धुरी हिल जाती है । परंतु यदि बेटा 15 दिवस की यात्रा पर भी चला जाये तो भी बहू के भरोसे घर सुचारू रूप से चलता रहता है ।

बिना बहू के सास-ससुर को ऐसा लगता है  *जैसा उनकी लाठी ही किसी ने छीन ली हो।* वे चाय नाश्ता से लेकर खाना के लिये छटपटा जाएंगे । कोई और पूछने वाला उनके पास नही होता ।

क्योंकि बेटे के  पास  समय  नही है और अगर बेटे को समय मिल जाये भी तो वो कुछ नही कर पायेगा क्योंकि उसे ये मालूम ही नही है *कि माँ-बाबूजी को सुबह से रात तक क्या क्या देना है ?* क्योंकि बेटे के चंद सवाल है और उसकी ज़िम्मेदारी खत्म...

 जैसे "माँ-बाबूजी ने खाना खा लिया?" "चाय पी लिये? "नाश्ता कर लिये?" लेकिन कभी भी ये जानने की कोशिश नही करते कि वे क्या खाते हैं? कैसी चाय पीते हैं? ये लगभग सभी घरों की कहानी है ।
मैंने तो अधिकतर ऐसी बहुएं देखी है जो अपनी सास की बीमारी में तन मन से सेवा करती हैं..  *इसलिये मेरा मानना है कि बहु ही होती हैं बुढ़ापे की असली लाठी*। 

   *लेकिन एक बात और सच है और सास ससुर को भी  "मेरा राजा बेटा!" "मेरी रानी बेटी!" की रट छोड़ "मेरी अच्छी बहु रानी!" की रट भी लगा लेनी चाहिए।*

हो सकता हैं यदि बहु में आपके प्रति थोड़ा कड़वापन भी आ गया हो तो वो धीरे धीरे कम हो जाएगा और आपके प्रति सम्मान की भावना बढ़ जायेगी*

अतः अपनी बहू में सिर्फ कमिया न ढूंढे, उसकी अच्छाइयों की कद्र करे ।

*"आज का संदेश"*                         
 बहु की त्याग और सेवा को पहचानिएं
*बेटे एवं बेटी के साथ बहु को भी अपना मानिए।*

 औऱ "मेरी बेटी- मेरा अभिमान" "मेरा बेटा- मेरा अभिमान" तो सही हैं...  

*एक बार गर्व से कह के तो देखो मेरी बहु-मेरा अभिमान।।* 
 
*👪⏰🎪⛳✅विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, जीवन में हम सभी का सच्चा सहारा केवल धर्म ही है। अगर हम सभी ने जीवन में धर्म के अनुसार आचरण नहीं किया तो हमारे जीवन में विश्व की कोई भी शक्ति हमारी रक्षा नहीं कर सकती। परिवार के सदस्यों से हमें सुख सुविधाओं के साधन प्राप्त हो सकते है किंतु आत्मिक सुख की प्राप्ति केवल सच्चे धर्म से ही होगी। अतः हम सभी को धर्म के प्रति श्रद्धा पूर्वक आचरण करना चाहिए। धर्म-कर्म से ही हमारा वर्तमान व भविष्य सुरक्षित किया जाता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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