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*सकारात्मक शक्ति*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सकारात्मक शक्ति ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल एकम दिनांक 21 अप्रैल शुक्रवार 17 वें तीर्थंकर कुन्थुनाथजी सभी को सभी सुख प्रदान करने वाले कुन्थुनाथजी का जन्म तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।✍️तीर्थंकर कुन्थुनाथ जी का है जन्म कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन कृतिका नक्षत्र में मातारानी श्रीकांता ने तीर्थंकर को जन्म दिया था |💡तप कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन पूर्वभव के स्मरण से वैराग्य हुआ कृतिका नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की थी |💯मोक्ष कल्याणक , शिखरजी में ज्ञानधर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पूर्व भाग में व कृतिका नक्षत्र में 1000 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 96 कोड़ा कोड़ी 96 करोड़ 32 लाख 96 हजार 742 मुनि सिद्ध भये थे|आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक 26, 28, 29 तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
👨👩👦👦अपने खेत में एक जवान लड़का और उसका दादा मिट्टी खोद रहे थे। वे मिट्टी को पलट रहे थे, उसकी गांठों को तोड़ रहे थे ताकि मिट्टी उस वर्ष की बुवाई के लिए अच्छे से तैयार हो सके।
उस काम में काफी कड़ी मेहनत थी लेकिन उनके सभी प्रयास एक अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए आवश्यक थे।
बूढ़ा आदमी अपने 70 की उम्र में भी अच्छी तरह से कड़ी मेहनत कर रहा थे। हा थकान से वो काफी हद तक हांफ भी रहे थे। हर प्रहार के जोर से उनके माथे से पसीना टपकता था लेकिन फिर भी वह शिकायत नहीं कर रहे थे ।
उनका पोता जो महज 17 साल का था, तंदुरुस्त और ताकतवर। वह मिट्टी को पलटने और गांठों को तोड़ने में लगती मेहनत और ताकत के लिए कोसता, फिर वहां खड़े होकर वह हांफता और थोड़ी देर के रुक जाता! थोड़ा आराम करने के बाद एक बार फिर से काम शुरू करने से पहले शिकायत करता।
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थोड़ी देर बाद, युवा पोता देखता है कि उसके दादाजी ने जितना काम कर जमीन को तैयार किया वो खुद ने कि तैयार की जमीन से बहोत ज्यादा हैं।
"दादाजी, जब आप इतने बूढ़े हो फिर भी आपने मुझसे इतना अधिक काम कैसे किया?" पोता अपने दादा से पूछता है।
दादाजी ने उसे जो जवाब दिया उसकी उसे उम्मीद नहीं थी।
"जब हम किसी काम को मुश्किल मानते है और उसके बारे में ज्यादा सोचते है तो सच में मुश्किल हो जाता है, और हम अपना लक्ष्य समझकर जब उसे करते है और करते ही रहते है तो वह आसान हो जाता है। विघ्नों को भी झुकना पड़ता है।"
पोता थोड़ा अचंभित हो जाता है इसलिए दादाजी अपनी बात जारी रखते हैं।
"जब हम अपना समय यह सोचने में बिताते हैं कि कोई काम कितना कठिन है, और अभी कितना सारा बाकी है,तब हमारा मन बहाने बनाने लगता हैं। ओर हम सपनों की दुनिया में अपना बहुमूल्य समय खराब कर देते है।
इन सभी चीजों के बारे में सोचना, अपने स्वयं के विचारों के बवंडर में फंसना ही उस काम को हमारे लिए बहोत ज्यादा कठिन बना देता है। इसलिए समझदारी इसी में है की वास्तविक रूप से पहली बार में मानसिक व शारीरिक कार्य किया जाए”
"जब आप तय किए काम के बारे में ज्यादा सोचते हैं और अपने दिमाग को नकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देते हैं, तो आपकी गति उस काम को करने के लिए अपने आप धीमी होते जाती है। अगर आपको किसी भी काम के दौरान सकारात्मकता बनाए रखना चाहते है तो आपको तुरंत उस काम को शुरू करना चाहिए और अगर देखना और सोचना है तो जीतना आप आगे बढ़े यानी की जितना काम आपने अच्छे से खत्म कर लिया उसे देखे न की जो बाकी है उसे!उसके बारे में विचार करे ऐसा करने से एक सुखद और सकारात्मक एहसास आपको उस काम को लगातार करते रहने की ऊर्जा देता रहेगा।
*🔔🎪⏰👪🪔विशेष -भव्य आत्माओं, हम सभी को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सुनियोजित रूप से मानसिक व शारीरिक मेहनत करना अनिवार्य है। अन्यथा चौरासी लाख योनियों में अनादि काल तक सुख भोगना पड़ेगा। वास्तव में चौरासी लाख योनियों में सुखाभास हो सकता है किंतु वास्तविक सुख नहीं है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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