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*लक्ष्य प्राप्ति के लिए**
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 लक्ष्य प्राप्ति के लिए*
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*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.वैशाख कृष्ण नवमी , शुक्रवार दिनांक 14 अप्रैल 2023 को 20 वें तीर्थंकर सभी के सभी विघ्नों के निवारणकर्ता मुनिसुव्रतनाथ भगवानजी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है। यह केवलज्ञान कल्याणक , राजगीर में रत्नागिरि पर्वत पर हुआ था | आज के ही दिन संध्या के समय श्रवण नक्षत्र में चम्पक वृक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी | साक्षात दर्शन करें ऐसे कल्याणक क्षेत्र के जहाँ श्री वासुपूज्य जी को छोड़कर सभी तीर्थंकरों का समवशरण आया --- हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली 15,19, 21,26, 28,29 तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*पाटिल नगर के राजा सायंकाल में अपनी रानियों के साथ महल की छत पर टहल रहा थे।अचानक उसकी दृष्टि महल के नीचे बाजार में घूमते हुए एक सन्त पर पड़ी। संत तो संत होते हैं, चाहे जंगल में हो बाजार में हों या मंदिर में अपनी धुन में खोए रहते हैं*।
*राजा ने महूसस किया वह संत बाजार में इस प्रकार आनंद में भरे चले जा रहे हैं जैसे वहां उनके अतिरिक्त और कोई है ही नहीं,न किसी के प्रति कोई राग दिखता है न द्वेष बस अपनी ही धुन में मगन चले जा रहे हैं*।
*राजा को संत की यह मस्ती इतनी भा गई कि तत्काल उनसे मिलने को व्याकुल हो गए*।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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*उन्होंने सेवकों से कहा इन्हें तत्काल लेकर आओ*।
*सेवकों को कुछ न सूझा तो उन्होंने महल के ऊपर से ही रस्सा लटका दिया और नीचे खड़े उनके साथियों ने उन सन्त को उस रस्से में बंधी कुर्सी की सहायता से ऊपर खींचवा दिया*।
*चंद मिनटों में ही संत राजा के सामने थे. राजा ने सेवकों द्वारा इस प्रकार लाए जाने के लिए सन्त से क्षमा मांगी,संत ने सहज भाव से क्षमा कर दिया और पूछा ऐसी क्या शीघ्रता आ पड़ी महाराज जो रस्सी में ही खिंचवा लिया* !
*राजा ने कहा- एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं अचानक ऐसा बेचैन हो गया कि आपको यह कष्ट देना पड़ा*।
*संत मुस्कुराए और बोले- ऐसी व्याकुलता थी अर्थात कोई गूढ़ प्रश्न है,तो बताइए क्या प्रश्न है*।
*राजा ने कहा- प्रश्न यह है कि भगवान् शीघ्र कैसे मिलें, मुझे लगता है कि आप ही इसका उत्तर देकर मुझे संतुष्ट कर सकते हैं ? कृपया मार्ग दिखाएं*।
*सन्त ने कहा‒‘राजन् ! इस प्रश्न का उत्तर तो तुम भली-भांति जानते ही हो, बस समझ नहीं पा रहे। दृष्टि बड़ी करके सोचो तुम्हें पलभर में उत्तर मिल जाएगा*।
*राजा ने कहा‒ यदि मैं सचमुच इस प्रश्न का उत्तर जान रहा होता तो मैं इतना व्याकुल क्यों होता और आपको ऐसा कष्ट कैसे देता,मैं व्यग्र हूं,आप संत हैं,सबको उचित राह बताते हैं*।
*राजा एक प्रकार से गिड़गिड़ा रहा था और संत चुपचाप सुन रहे थे जैसे उन्हें उस पर दया ही न आ रही हो,फिर बोल पड़े सुनो अपने उलझन का उत्तर*।
*सन्त बोले- सुनो, यदि मेरे मन में तुमसे मिलने का विचार आता तो कई अड़चनें आतीं और बहुत देर भी लगती । मैं आता, तुम्हारे दरबारियों को सूचित करता। वे तुम तक संदेश लेकर जाते*।
*तुम यदि फुर्सत में होते तो हम मिल पाते और कोई जरूरी नहीं था कि हमारा मिलना सम्भव भी होता या नहीं*।
*परंतु जब तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार इतना प्रबल रूप से आया तो सोचो कितनी देर लगी मिलने में* ?
*तुमने मुझे अपने सामने प्रस्तुत कर देने के पूरे प्रयास किए. इसका परिणाम यह रहा कि घड़ी भर से भी कम समय में तुमने मुझे प्राप्त कर लिया*।
*हे राजन् ! इसी प्रकार यदि भगवान् को पाने की व्याकुलता हो तो भगवान् तत्काल तुम्हारे सामने आ जाएंगे*।
*राजा ने पूछा- परंतु भगवान् के मन में हमसे मिलने का विचार आए तो कैसे आए और क्यों आए* ?
*सन्त बोले- तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार कैसे आया* ?
*राजा ने कहा‒ जब मैंने देखा कि आप एक ही धुन में चले जा रहे हैं और सड़क, बाजार, दूकानें, मकान, मनुष्य आदि किसी की भी तरफ आपका ध्यान नहीं है, उसे देखकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि मेरे मन में आपसे तत्काल मिलने का विचार आया*।
*सन्त बोले- यही तो तरीका है भगवान को प्राप्त करने का,राजन् ! ऐसे ही तुम एक ही धुन में भगवान् की तरफ लग जाओ, अन्य किसी की भी तरफ मत देखो, उनके बिना रह न सको, तो भगवान् के मन में तुमसे मिलने का विचार आ जायगा और वे तुरन्त मिल भी जायेंगे*।
*क्या समझे*
*🕉️🙏👪🤜🔑विशेष:-भव्य आत्माओं, जबतक हमारी किसी भी कार्य को करने के लिए उसमें दृढ़ संकल्प व एकाग्रता नहीं होगी तब-तब हमें लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होगी।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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