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*शुद्धिकरण कैसे करें*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 शुद्धिकरण कैसे करें ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण दसमी , दिनांक 12 जुलाई बुधवार कलिकाल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक 12 तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी। वहीं थोड़ी दूरी पर एक सन्त ने अपना बसेरा किया हुआ था। जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें, अतः सभी सन्त के पास पहुँचे।
जब सन्त ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ ? तो लोगों ने कहा, “महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है।”
सन्त ने पुछा- हुआ क्या ? पानी क्यों नहीं पी सकते हो ?
लोग बोले- तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे। बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में। अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कैसे पिये महात्मा जी ?
सन्त ने कहा - 'एक काम करो, उसमें गंगाजल डलवाओ।
कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया। फिर भी समस्या जस की तस रही। लोग फिर से सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, "भगवान की कथा कराओ।”
लोगों ने कहा, “ठीक है।” कथा हुई, फिर भी समस्या जस की तस। लोग फिर सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ। सुगंधित द्रव्य डाला गया, नतीजा फिर वही। ढाक के तीन पात। लोग फिर सन्त के पास, अब सन्त खुद चलकर आये।
लोगों ने कहा- महाराज ! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया। गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं।
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अब सन्त आश्चर्यचकित हुए और पूछा- कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते जो मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं ?
लोग बोले - उसके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया। वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं।
सन्त बोले - "जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा।"
ऐसी ही कथा हमारे जीवन की भी है। इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये *काम, क्रोध और लोभ* के तीन कुत्ते लड़ते झगड़ते गिर गये हैं।
हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं, तीर्थयात्रा कर लो, गंगा स्नान कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ।
सब करते हैं, पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है। तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी जीवन उपयोगी होगा।
*🔔🎪🌞🕉️✅विशेष:-भव्य आत्माओं,इस कहानी में बताया है कि कुआं के पानी को शुद्धिकरण के लिए ना गंगाजल,ना कथा , ओर ना ही प्रसाद की आवश्यकता थी। ✍️💯उस कुआं के जल की शुद्धिकरण के लिए उसमें गिरे हुए कुत्तों को बाहर निकालने के बाद मोटरपंप के द्वारा कम से कम उपरी सतह का तीन फीट पानी खाली करना था उसके पश्चात उस कुआं में मात्र चालीस रुपए किलो की एक किलो लाल फिटकरी पानी में घोलकर वह घुला हुआ पानी डालना था।इस क्रिया के बारह घंटे बाद वह पानी पीने योग्य हो जाता।🐒 वर्तमान में हम मोबाइल व अन्य माध्यमों के द्वारा इसी प्रकार अनेकों उपाय कर रहे है किंतु समस्या हल होने की जगह समस्याएं बढ़ती जा रही है। इसलिए हमें योग्य शिक्षक से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए।वह शिक्षक हमारे घर के दादाजी व दादी भी हो सकते है। हमारे घर के दरवाजे पर आया हुआ भिखारी भी हमें शिक्षा प्रदान करता है कि जब मेरे पास सबकुछ था तब मैंने किसी अन्य की किसी प्रकार भी मदद नहीं की ओर उसी कर्म के कारण मैं आज मनुष्य बनकर भी भिखारी बना हुआ हूं।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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