शनिवार, 15 जुलाई 2023

दयावान कौन

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*दयावान कौन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 दयावान कौन ✍️🐒*


उस बस स्टैण्ड में तीन दयालु व्यक्ति, और एक कहीं से भी दयालु नहीं लगने वाला व्यक्ति बैठा था । वो सभी बातें कर ही रहे थे कि इतने में एक बुढ़िया अपने दोनों बेटों के विक्षिप्त होने के कारण दाने-दाने को मोहताज़ होने की जानकारी देते हुए रोने लगी । 

इस पर पहले दयालु ने कहा-‘‘तुम लोग भूखे मर रहे हो इसका यह अर्थ हेै कि, राज्य नीति-निर्देशक तत्वों का पालन नहीं कर रहा है, मैं इस बात को विधानसभा और लोकसभा तक ले जाऊँगा ।’’

दूसरे दयालु ने कहा-‘‘ये तुम्हारे गाॅंव वालों के लिये शर्म की बात है कि उनके होते हुए एक परिवार भूख से मर रहा है ।’’ 

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तीसरे दयालु ने कहा-‘‘माई अब रोना-धोना बंद करो । मैं बड़ा ही भावुक क़िस्म का आदमी हूॅं । तुम्हें रोता देखकर मुझे भी रोना आ रहा है ।’’

चौथा व्यक्ति निस्पृह भाव से उनकी बातें सुनता रहा, और फिर उठकर वहाँ से चला गया । 

इस पर एक दयालु ने कहा-देखो तो लोग दो शब्द सांत्वना के भी नहीं बोल सकते। कुछ देर बाद वह चौथा व्यक्ति एक थैले में दस क़िलो चावल लेकर आया, और बड़ी ही ख़ामोशी से उसने उस बुढिया को थैला सौंप दिया। 

अचानक तीनों दयालुओं का हाथ अपने-अपने गालों तक पहुँच गया । उन्हेंं ऐसा लगा, जैसे उन्होंने झन्नाटेदार थप्पड़ स्वयं को रसीद कर दिया हो ।

*भव्य आत्माओं:- इस कथानक से आप स्वयं का आकलन कर स्वयं का सुधार करें। वर्तमान समय में हमारी जितनी आयु हो गई उसमें हमनें दुसरों के सुधार के लिए प्रयास किया किंतु स्वयं के सुधार के बारे में नहीं सोचा। अतः इस कहानी से प्रेरणा लेकर संकल्पित हो ओर अपने स्वयं के कल्याण के प्रति समर्पित हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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