शुक्रवार, 23 जून 2023

आशीर्वाद या दुर्भाग्य

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*आशीर्वाद या दुर्भाग्य*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आशीर्वाद या दुर्भाग्य ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में *🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी, दिनांक 24 जून  शनिवार कलिकाल के 24 वें तीर्थंकर  शासन नायक वर्धमान स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। गर्भ कल्याणक  महोत्सव कुण्डलपुर में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व उत्तराषाढ नक्षत्र में मातारानी त्रिशला के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे |  --- 🛕* 
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, दिनांक 25 जून  रविवार कलिकाल के 22 वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमीनाथ  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।  तीर्थंकर नेमिनाथजी का  मोक्ष कल्याणक  महोत्सव गिरिनार पर्वत पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के प्रारंभ काल व चित्रा नक्षत्र में 535 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | यहाँ से 72 करोड़ 700 मुनि सिद्ध भये | साक्षात दर्शन कर अपने पुण्य को गाढ़ा करें इस पवित्र पर्वत की वंदना कर---🛕*
*✍️यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*✍️आइये आज हम इस कहानी के माध्यम से स्वयं का आकलन करें हमें कितना आशीर्वाद व दुर्भाग्य प्राप्त हो रहा है।✍️*
एक गांव में एक गरीब बूढ़ा रहता था। वह बहुत गरीब था, फिर भी उनके पास एक सुंदर सफेद घोड़ा था। इसके कारण, राजा के लोग भी उनसे ईर्ष्या करते थे।

उसे उस सफेद घोड़े को बेचने के लिए, राजा के तरफ से अच्छी कीमत दी गई थी। लेकिन बूढ़ा आदमी यह कहते हुए मना कर देता था, “यह मेरे लिए सिर्फ घोड़ा नहीं है। वह एक व्यक्ति और मेरा अच्छा दोस्त है। क्या आप किसी व्यक्ति या दोस्त को बेच सकते हैं। नहीं यह हमारे लिए संभव नहीं है।”

एक दिन सुबह जब वह खलिहान घर मैं गया।तो उसने देखा कि घोड़ा वहां नहीं है।यह खबर गांव में जल्दी फैल गई और पूरा गांव उनके घर पर जमा हो गया।

गांव वालों ने कहा,“तुम मूर्ख बूढ़े हो।हर कोई उस घोड़े को पाना चाहता था।सभी जानते थे कि, किसी दिन यह घोड़ा चोरी हो जाएगा।

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आप उस घोड़े को अच्छी कीमत पर बेच सकते थे।फिर भी आपने उसे रखा।अब घोड़ा चला गया है,यह आपका दुर्भाग्य है।”

बूढ़े आदमी ने जवाब दिया,“सच तो यह है कि घोड़ा स्थिर नहीं है। बाकी सब कुछ जो तुम कहते हो वह एक फैसला है।आप कैसे जानते हैं यह दुर्भाग्य है या नहीं?”

लोगों ने जवाब दिया,“हमें मूर्ख मत बनाओ।आपका सफेद घोड़ा चला गया है,यह आपका दुर्भाग्य है।”

गांव के लोग उस पर हंसे और चले गए।उन्होंने कहा कि वह पागल है।वह उस घोड़े को बेच सकता था।और गरीबी में जीने की वजह एक बेहतर जीवन जी सकता था।

कुछ दिनों के बाद,सफेद घोड़ा जंगल से वापस आया।उसके साथ कुछ और जंगली घोडे भी आए।

गांव के लोग फिर उनके घर पर इकट्ठा हो गए और बोले,“आप सही थे,यह दुर्भाग्य नहीं बल्कि आशीर्वाद है।अब आपके पास और भी सुंदर घोड़े हैं।आप उन्हें प्रशिक्षित कर सकते हैं और बेच सकते हैं।”

बुढे ने उत्तर दिया, “फिर से आप बहुत दूर जा रहे हो।बस आप यह कहे की घोड़ा वापस आ गया है और अधिक घोड़ों का होना एक आशीर्वाद है।यह केवल एक टुकड़ा है,एक दिन यह भी गुजर जाएगा।”

इस बार गांव के लोग चुप रहे। बूढ़े आदमी के इकलौते बेटे ने घोड़ों को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया।कुछ दिनों के बाद उन जंगली घोड़ों को प्रशिक्षण देने के दौरान,बूढ़े का बेटा घोड़े से गिर गया और उसके पैर टूट गया।

इस बात को सुनकर गांव के लोग इकट्ठे हो गए और बोले,“आप ठीक कह रहे थे,अधिक घोडे होना कोई आशीर्वाद नहीं है।अब तुम्हारा बेटा इससे घायल हुआ है।इस बुढ़ापे में,अपने अपाहिज बेटे का क्या करोगे?”

बूढ़े ने उत्तर दिया,“इतनी दूर मत जाओ।इतना ही कहो,कि मेरे बेटे की टांग टूट गई है।कौन जानता है,कि यह दुर्भाग्य है या आशीर्वाद?किसी को नहीं मालूम।”

एक महीने बाद,युद्ध के कारण,गांव के सभी युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर होना पड़ा।इसीलिए युवाओं के माता-पिता और गांव के सभी लोग रो रहे थे।

गांव के लोग बूढ़े आदमी के पास आए और कहां,“हमारे बेटे हमेशा के लिए चले गए।आपके बेटे की चोट लगना वरदान साबित हुई है।कम से कम वह जिंदा है और आपके साथ रह रहा है।”

बूढ़े ने उत्तर दिया, “कोई नहीं जानता। इतना ही कहो,हमारे बेटे को सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर किया गया और आपके बेटे को मजबूर नहीं किया गया। लेकिन कोई नहीं जानता यह आशीर्वाद है या दुर्भाग्य है।केवल भगवान जानता है।”

 हमें किसी भी स्थिति का न्याय केवल उसी से नहीं करना चाहिए,जो हम देखते हैं।हम कभी यह नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है..!!

   *🔔✍️👪⏰👣विशेष:-भव्य आत्माओं,इस कहानी में बताए गये आशीर्वाद को प्राप्त करना है तो आपको अभी से ही अपने सच्चे धर्म के अनुसार आचरण करना होगा। वरना काल चक्र में हम कितना भी चाहें कि आशीर्वाद प्राप्त हो किंतु हमें दुर्भाग्य ही मिलेगा। यही प्रकृति का अटूट नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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