सोमवार, 26 जून 2023

पिता व पुत्र

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*पिता और पुत्र*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒पिता और पुत्र  ✍️🐒*

एक बार पिता और पुत्र जलमार्ग से यात्रा कर रहे थे, और दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई। पिता ने पुत्र से कहा, अब लगता है हम दोनों का अंतिम समय आ गया है। दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।

अचानक उन्हें एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें। उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए। एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।

पुत्र ने ईश्वर से कहा: हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें। प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये।

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उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया। फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ। तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।

अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न हम ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे? उसने ऐसा ही किया। उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर हम यहाँ से बाहर निकल सकें। तत्काल नाव प्रकट हुई, और पुत्र स्त्री के साथ उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।

तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अपने पिता को छोड़कर जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे?

तो पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी। शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना?

आकाशवाणी कहती है: बेटा, क्या तुम्हें पता है, कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की?

पुत्र बोला: नहीं।

 _*तो सुनो: तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की, हे भगवन! मेरा बेटा आपसे जो माँगे, उसे दे देना।*_

*विशेष :- भव्य आत्माओं , मां के चरणों में स्वर्ग होता है, मां बिना जीवन अधूरा है, लेकिन अगर मां जीवन की सच्चाई है तो पिता जीवन का आधार, मां बिना जीवन अधूरा है तो पिता बिना अस्तित्व अधूरा। जीवन तो मां से मिल जाता है लेकिन जीवन के थपेड़ो से निपटना तो पिताजी से ही आता है, जिंदगी की सच्चाई के धरातल पर जब बच्चा चलना शुरू करता है तो उसके कदम कहां पड़े और कहां नहीं.. ये समझाने का काम पिता ही करते हैं।*
*पिता अगर पास है तो किसी बच्चे को असुरक्षा नहीं होती है। पिता एक वट वृक्ष है जिसके पास खड़े होकर बड़ी से बड़ी परेशानी छोटी हो जाती है।* 
*पिता भी मां की तरह ही बच्चों से प्यार करते हैं, लेकिन उनका स्वभाव और जिम्मेदारी मां से अलग होती हैं, जहां मां से बच्चे मे प्रेम, करुणा, अपनापन आदि गुण विकसित होते हैं, पिता से बच्चा सख्त होना सीखता है, अनुशासन सीखता है, इसका ये अभिप्राय नहीं है कि मां कमजोर है या कुछ और...पिता को बच्चों के प्रति प्यार जताना नही आता या शायद वो जताता नहीं ......बच्चों का मन अबोध होता है उनके लिए मां बाप मे कोई भेद नहीं पर मां ज्यादा समय साथ होती है, बिलकुल परछाई की तरह और प्राकृतिक रूप से भी मां से जुड़ाव स्वभाविक होता है, और जब तक बच्चे पिता की भावनाओ को समझने के काबिल होते हैं वो दुनियादारी और जिम्मेदारी के बोझ तले आ जाते हैं, बस सोचते रह जाते हैं पिता के प्यार और त्याग को, सोचते रह जाते हैं उन्हें धन्यवाद देने को और पिता छोड़ जाते हैं हमेशा के लिए, और उस वक्त इस घनी परछाई की छाया की महत्ता पता चलती है, पर तब तक समय बीत चुका होता है, बस हम अश्रुपूर्ण आंखों से यही कह सकते हैं *पिताजी में भी आप जैसा संस्कारवान बनूंगा।* 

"किसी ने क्या खूब चन्द पंक्तिया लिखी हैं"
जो पिता के पैरों को छूता है *वो कभी गरीब नहीं होता।* 

जो मां के पैरों को छूता है  वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई के पैराें को छुता हें वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन के पैरों को छूता है वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू के पैरों को छूता है उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता.......

 *अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ।।* 

 
_*कर सके तो लोगों पर तीन एहसान अवश्य कीजिए:*_ 
 _*1.फायदा नही पहुंचा सकते तो नुकसान भी ना पहुंचाए, 2.खुशी नही दे सकते तो दुख भी ना पहुंचाए और  3.तारीफ नही कर सकते तो बुराई भी ना करें।*_ 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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