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*पुण्य की महिमा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 पुण्य की महिमा ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*एक बड़ा व्यापारी नदी में स्नान करने गया। उस दिन वहां काफी भीड़ थी। व्यापारी की नजर नदी में डूबते हुए एक व्यक्ति पर पड़ी। वह तुरंत नदी में कूद गया। व्यक्ति को बाहर निकालने पर देखा कि वह उनका अकाउंटेंट मुनीम था।*
*कुछ देर बाद अकाउंटेंट को होश आया। व्यापारी ने उससे इस हालत में पहुंचने का कारण पूछा। अकाउंटेंट ने बात बनाते हुए कहा, ‘मैंने अपना सारा पैसा शेअर बाजार में खो दिया है। लोगों का काफी उधार है मुझ पर। उन्हीं लोगों के डर से मैंने यह कदम उठाया है।*
*व्यापारी ने अकाउंटेंट को सांत्वना दी व कहा, ‘अब चिंता छोड़ो, भविष्य में कभी ऐसा काम मत करना। ईमानदारी से सेवाकार्य करते रहो। व्यापारी ने सभी का कर्ज चुका दिया।अकाउंटेंट को सेवा करते हुए तीन साल बीत गये।*
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*इस बीच व्यापारी को काफी लाभ हुआ। अकाउंटेंट की नियत फिर खराब हो गयी। एक दिन उसके बेटे का जन्मदिन था। उसने सबको खीर खिलाई। व्यापारी के लिए भी एक कटोरा खीर लेकर वह उनके घर पहुंचा।*
*व्यापारी व्यस्त था तो उसे कटोरा मेज पर रखने को कह दिया। काम करते हुए देर हो गयी। थोड़ी देर बाद देखा तो खीर का कटोरा बिल्ली खा रही थी, जिसे खाते ही उसकी सेहत बिगड़ गयी।*
*व्यापारी को समझ आ गया, पर उसने किसी के सामने जिक्र नहीं किया। सोचा कि जब तक मेरा पुण्य मेरे साथ है, मेरा कुछ नहीं हो सकता।*
*अगले दिन अकाउंटेंट ने जब व्यापारी को देखा तो सकपका गया। व्यापारी ने फिर भी कुछ उजागर नहीं किया। अकाउंटेंट को लगा कि व्यापारी को कुछ पता नहीं चला।*
*वह फिर व्यापारी का धन हड़पने के बारे में सोचने लगा। एक दिन व्यापारी को कहीं जाना था। उसने अकाउंटेंट को भी मोटे रूपये साथ लेकर चलने को कहा।*
*अकाउन्टेन्ट ने व्यापारी को नुकसान पहुँचाने के लिए कुछ गुंडों को साथ रख लिया। एक मंदिर आया। व्यापारी उस ओर जाने लगा। वह जैसे ही झुका, गुंडों ने हमला कर दिया। व्यापारी वहीं बेहोश होकर गिर गया। अकाउंटेंट जैसे ही धन लेकर भागने लगा तो गुंडों की नीयत बिगड़ गयी। उन्होंने धन छीनकर उसे नदी में धकेल दिया।*
*व्यापारी को होश आया तो सामने अकाउंटेंट को डूबते हुए देखा। अपने दयालु स्वभाव के अनुसार सेठ ने फिर अकाउंटेंट को बचा लिया। होश में आने के बाद अकाउंटेंट ने व्यापारी के पैर पकड़े और क्षमा मांगने लगा।*
*व्यापारी ने उसे मन ही मन क्षमा कर दिया। केवल इतना ही कहा- जब तक किसी के पुण्य की जड़ें हरी हैं, तब तक कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।*
*सार :- परोपकार एवं नेक कर्म करके पुण्य कमाते रहिये। पुण्य इसलोक एवं परलोक दोनों जगह काम आता है जबकि धन दौलत केवल इस लोक में हमारी भौतिक आवश्यकताओं को ही पूरा करने में सक्षम है।*
*इस धन से कुछ परोपकार पुण्य अर्जित करिये, जरूरमन्दों की दुखियों की बीमारों की जो निर्धन है उनकी सहायता कीजिये, धर्म-कर्म दान करते रहिए*
*धर्म के चार चरण (सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं*
_*कर सके तो लोगों पर तीन एहसान अवश्य कीजिए:*_
_*1.फायदा नही पहुंचा सकते तो नुकसान भी ना पहुंचाए,*
*2.खुशी नही दे सकते तो दुख भी ना पहुंचाए और*
*3.तारीफ नही कर सकते तो बुराई भी ना करें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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