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*सुख में आप दुःख में हम*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सुख में आप दुःख में हम ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ कृष्ण दूज दिनांक 5 जून सोमवार कलि काल के प्रथम तीर्थंकर सभी को संस्कार प्रदान करने वाले आदिनाथ स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 09 , 13 , 24, 25, तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
✍️एक बार एक शिकारी शिकार करने के लिए जंगल में पहुंचा। उसने अपने तीर पर बहुत ही खतरनाक जहर लगाया और शिकार को निशाना बना करके उसने तीर को छोड़ा लेकिन उसका तीर चूक गया और तीर एक पेड़ पर जा लगा। वह पेड़ बहुत ही हरा-भरा और बहुत सारे तोते उस पेड़ पर रहते थे।
जैसे ही वह जहरीला तीर उस पेड़ पर जाकर लगा वह पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगा।
उस पेड़ पर जो भी तोते रहते थे वह एक-एक करके उस पेड़ को छोड़कर जाने लगे।
उस बड़े से पेड़ के कोटर में एक बहुत ही बूढ़ा तोता रहता था जो बहुत ही धर्मात्मा और अच्छे मन का था।
सभी तोते उस पेड़ को छोड़कर जाने लगे थे लेकिन वह बूढ़ा तोता जाता था दाना लेकर के आता और उसी कोटर में आ करके बैठ जाता था परन्तु उस पेड़ को छोड़ने को तैयार नहीं था।
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बूढ़े तोते के साथियो ने कई बार आकर के उसे समझाया की यह पेड़ सुख रहा है और किसी दिन गिर भी जायेगा, चलो किसी और पेड़ पर चल कर रहा जाये परन्तु वह बूढ़ा तोता वहा से जाने को तैयार नहीं हो रहा था।
अब यह बात देवराज इंद्र तक पहुंची उन्हें बताया गया की एक तोता है वह जिस पेड़ पर रहता है उस पेड़ पर एक जहरीला तीर लगने के कारण सूखने, गिरने और ख़त्म होने के कगार पर आ पंहुचा है और एक बूढ़ा तोता अभी भी वही पर रह रहा है वह दाना लेकर आता है और वही पर रहता है जब की उस जंगल में बहुत सारे पेड़ है लेकिन वह उसी पेड़ पर रह रहा है।
देव राज इंद्र प्रगट हुए और उस बूढ़े तोते से कहने लगे की आप बहुत धर्मात्मा है, बहुत ही अच्छे मन के है लेकिन आप इस पेड़ को छोड़कर किसी और पेड़ पर चले जाईये क्योकि यह पेड़ कुछ ही दिनों में गिर जायेगा।
तालाब के पास में बहुत से बड़े-बड़े, हरे-भरे पेड़ है, बड़े-बड़े कोटर है उन पेड़ो पर फल भी लगे हुए है उन्हें वही पर तोड़कर खा सकते है, परन्तु यहाँ से आप चले जाये।
तोता बोला माफ़ कीजियेगा, इस पेड़ ने मुझे जीवन दिया है शिकारियों से मेरी रक्षा की है, हर मौषम में मेरे साथ रहा है ये कोटर मेरा घर है यहाँ मै पला बढ़ा हूँ, इस पेड़ को मै छोड़कर कैसे जा सकता हूँ। इस पर संकट आया है तो क्या मै इसे छोड़कर चला जाऊ, मै ऐसा कभी नहीं कर सकता।
देवराज इंद्र तोते के इस बात से बहुत ही प्रसन्न हुए उन्होंने तोते से कहा मै आपके इस बात से बहुत ही खुश हूँ मागो जो आपको मागना हो। उस बूढ़े तोते ने कहा मुझे बस इतना मागना है की जिस पेड़ पर मेरा ् जन्म हुआ, जहा मै रहा, पला बढ़ा जिसे आप मेरा जन्म भूमि कह सकते हो आप इसे फिर से वैसा ही हरा-भरा कर दो जैसा यह था।
देवराज इंद्र ने अमृत से उस पेड़ को सिच दिया और पहले की तरह हरा-भरा कर दिया। अब वापस से उस पेड़ पर आकर के बाकि तोते रहने लगे वह बूढ़ा तोता कुछ समय तक और जिन्दा रहा फिर उसकी मृत्यु हो गयी और वह स्वर्ग में चला गया।
यह कहानी हमें सिखाती ये है की जब भी किसी इंसान का बुरा दौर आता है तो मानसिक रूप से वह टुटा हुआ होता है उसे किसी के सहारे की जरुरत होती है। किसी की आवश्यकता होती है। अगर आप ऐसे समय में उसे छोड़कर चले जायेंगे, उससे बात नहीं करेंगे मुँह मोड़ लेंगे तो आपसे बुरा कोई नहीं है क्योकि आप किसी के सुख का साथी बने या ना बने लेकिन आपको हमेशा किसी के दुःख का साथी जरूर बनना चाहिए।
*👪⏰✅🪜🎪विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हमारे जीवन में भी कुछ लोगों के निमित्त से हम आज बहुत कुछ सुखी है।उन व्यक्ति विशेष ने हमें विषम परिस्थितियों में साथ दिया हमें उनका उपकार याद करते हुए उनकी भी सम परिस्थिती हो या विषम परिस्थितियों में हमें अपनी शक्ति अनुसार उनका सहयोग करना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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