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*संस्कारवान बहू*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 संस्कारवान बहू ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*हमारा एकलौता बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था ...*
*इसलिए बात-बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था ये वही मां थी जो बेटे के लिए पति से भी लड़ जाती थी। मगर अब* *कमाऊ पूत बेटा पिता के कई बार समझाने पर भी इग्नोर कर देता और कहता, "यही तो उम्र है शौक की,खाने पहनने की, जब आपकी तरह मुँह में दाँत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।"*
*बहू खुशबू भी भरे पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी अच्छी थी तो मित्र मंडली उसी हिसाब से मॉडर्न थी। बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती .....*
*वो कहता "कमाल करती हो तुम, आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है,मैं क्या कुछ नया कर रहा हूं क्या। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूं और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो। जीवन का स्थर क्या होता है तुम्हें मालूम ही नहीं।"*
*और बहू कहती "जीवन का स्थर क्या होता है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि जीवन की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्वास रखती हूँ।"*
*कुछ समय पश्चात अचानक पापा आई. सी. यू. में एडमिट हुए थे। हार्ट अटेक आया था। डॉक्टर ने पर्चा पकड़ाया, पंद्रह लाख और जमा करने थे। पांच लाख का बिल तो पहले ही भर दिया था मगर अब ये दस लाख भारी लग रहे थे। वह बाहर बैठा हुआ सोच रहा था कि अब क्या करे।*
*उसने कई दोस्तों को फ़ोन लगाया कि उसे मदद की जरुरत है, मगर किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बहाना कर दिया। आँखों में आँसू थे और वह उदास था तभी खुशबू खाने का टिफिन लेकर आई और बोली,"अपना ख्याल रखना भी जरुरी है। ऐसे उदास होने से क्या होगा? हिम्मत से काम लो, बाबू जी को कुछ नहीं होगा आप चिन्ता मत करो। कुछ खा लो फिर पैसों का इंतजाम भी तो करना है आपको मैं यहाँ बाबूजी के पास रूकती हूँ आप खाना खाकर पैसों का इंतजाम कीजिये। "पति की आँखों से टप-टप आँसू झरने लगे।*
*"कहा न आप चिन्ता मत कीजिये। जिन दोस्तों के साथ आप मॉडर्न पार्टियां करते हैं आप उनको फ़ोन कीजिये, देखिए तो सही, कौन कौन मदद को आता हैं। "पति खामोश और सूनी निगाहों से जमीन की तरफ़ देख रहा था। कि खुशबू का हाथ उसकी पीठ पर आ गया। और वह पीठ को सहलाने लगी।*
*"सबने मना कर दिया। सबने कोई न कोई बहाना बना दिया खुशबू।आज पता चला कि ऐसी दोस्ती तब तक की है जब तक जेब में पैसा है। किसी ने भी हाँ नहीं कहा जबकि उनकी पार्टियों पर मैंने लाखों उड़ा दिये।"*
*"इसी दिन के लिए बचाने को तो माँ-बाबा कहते थे। खैर, कोई बात नहीं, आप चिंता न करो, हो जाएगा सब ठीक। कितना जमा कराना है?"*
*"अभी तो तनख्वाह मिलने में भी समय है, आखिर चिन्ता कैसे न करूँ खुशबू ?"*
*"तुम्हारी ख्वाहिशों को मैंने सम्हाल रखा है।"*
*"क्या मतलब....?"*
*"तुम जो नई नई तरह के कपड़ो और दूसरी चीजों के लिए मुझे पैसे देते थे वो सब मैंने सम्हाल रखे हैं। माँ जी ने फ़ोन पर बताया था, दस लाख जमा करने हैं। मेरे पास पांच लाख थे। बाकी मैंने अपने भैया से मंगवा लिए हैं। टिफिन में सिर्फ़ एक ही डिब्बे में खाना है बाकी में पैसे हैं।" खुशबू ने थैला टिफिन सहित उसके हाथों में थमा दिया।*
*"खुशबू ! तुम सचमुच अर्धांगिनी हो, मैं तुम्हें मॉडर्न बनाना चाहता था, हवा में उड़ रहा था। मगर तुमने अपने संस्कार नहीं छोड़े. आज वही काम आए हैं। "*
*सामने बैठी मां के आंखो में आंसू थे उसे आज खुद के नहीं बल्कि पराई मां के संस्कारो पर नाज था और वो बहु के सर पर हाथ फेरती हुई ऊपरवाले को स्मरण कर रही थी भगवान आपकी कृपा से सबकुछ अच्छा हो रहा है।*
*🔔🎪🙏👪✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,आज हरेक व्यक्ति अपने बेटे की शादी में दहेज लेना पसंद करते है किंतु वह लड़की संस्कारवान है या नहीं इसकी आवश्यकता नहीं समझते।इस कारण से आज एकल परिवार होने से सम्पूर्ण भारत में विसंगतियां फैल रही है। आपके घर में बेटा हो बेटी उसे अपने धर्म के अनुसार भोजन, वेशभूषा व बातचीत इतने संस्कार आपने दे दिये तो आपको विश्व में जितने तीर्थ है उन सभी का घर बैठे आशीर्वाद प्राप्त होगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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