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*वसीयत के अनुसार बंटवारा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 वसीयत के अनुसार बंटवारा ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
एक गांव में एक व्यक्ति के पास 19 घोड़े थे। एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:
मेरे 19 घोडों में से आधे मेरे बेटे को,19 घोड़ों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 घोड़ों में से पांचवा हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएं।
सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बंटवारा कैसे हो ?
19 घोडों का आधा अर्थात एक घोड़ा काटना पड़ेगा, फिर तो घोड़ा ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार. फिर?
सब बड़ी उलझन में थे।
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फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया।
वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने घोड़े पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 घोड़ों में मेरा भी घोड़ा मिलाकर बाँट दो।
सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी घोड़ा मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।
19+1=20 हुए।
20 का आधा 10, बेटे को दे दिए।
20 का चौथाई 5, बेटी को दे दिए।
20 का पांचवाँ हिस्सा 4, नौकर को दे दिए।
10+5+4=19
बच गया एक घोड़ा, जो बुद्धिमान व्यक्ति का था...वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।
इस प्रकार 1 घोड़ा मिलाने से, बाकी 19 घोड़ों का बंटवारा सुख, शांति, संतोष व आनंद से हो गया।
हम सब के जीवन में भी 19 *घोड़ें* होते हैं।
*5 ज्ञानेंद्रियाँ*(आँख, नाक, जीभ, कान, त्वचा)
*5 कर्मेन्द्रियाँ*(हाथ, पैर, जीभ, मूत्र द्वार, मलद्वार)
*5 प्राण*(प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान)
और
*4 अंतःकरण*(मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) कुल 19 घोड़े होते हैं।
*सारा जीवन मनुष्य इन्हीं 19 घोड़ों के बँटवारे में उलझा रहता है।* और जब तक उसमें आत्मज्ञान रूपी घोड़ा नहीं मिलाया जाता तब तक जीवन की गुत्थी सुलझ नहीं सकती आज सबके पास सब कुछ है पर आत्म ज्ञान नहीं है इसी कारण सब गडबड है कुछ सुलझ नहीं पा रहा
इंसान क्यों जी रहा है
जीवन का क्या उद्देश्य है कहां जाना है मरणोपरांत कुछ पता नहीं।
*विशेष :- भव्य आत्माओं,हम अनादि काल से वसीयत के उत्तराधिकारी बनें हुए है। जबतक हम इस वसीयत को सच्चे धर्म के अनुसार विभाजित नहीं करेंगे तब तक हमारा जन्म चौरासी लाख योनियों में होगा। चौरासी के चक्कर से बचने के लिए हमें सत्य धर्म का सहारा लेना होगा। यही प्रकृति का पहला व अंतिम सत्य है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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