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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒वर्तमान के बनिया💐💐*
किसी गांव में भोला नाम का एक लड़का रहता था। घर में वह और उसकी मां केवल दो प्राणी थे। पिता, उसके बचपन में ही चल बसे थे। भोला गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा सका। कमाने के लिए वह एक सेठ के यहां नौकरी करने लगा। नाम के अनुसार ही वह भोला-भाला था। सेठ उसे समय समय पर ठगता रहता था। कम रुपए देता व काम ज्यादा लेता। भोला दुःखी रहता था।
किसी तरह उसे पता चला कि उसके गांव में साक्षरता कक्षा चल रही है। वह वहां पढ़ने जाने लगा। जल्दी ही वह हिसाब लगाने लगा। रुपयों पैसों का हिसाब वह अंगुलियों पर गिनकर कर लेता उसने सेठजी से बदला लेने की सोची।
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एक दिन उसने सेठ से सौ रुपए उधार मागे और काम छोड़कर चला गया।
काफी दिन तक वह सेठ के पास नहीं आया। सेठ तो था कंजूस। वह सौ रुपयों के बारे में सोच सोचकर परेशान रहता।
एक दिन रास्ते में भोला मिला। सेठ ने भोला से कहा, भोला, कुछ दिन पहले तुमने मुझसे सौ रुपए उधार लिए थे वह लौटा दो।” भोला ने आंखे मटकाते हुए कहा, “कौन से रुपए सेठ जी? वह तो कब के खर्च हो गए। सेठजी ने कहा, “किसमें खर्च हुए।”
भोला ने कहा, “सुनो सेठजी। मैं सारा हिसाब बताता हूं।”
दस के ले लिए आजरा-बाजरा, दस के ले लिए जौ, सेठजी अब काहै के सौ।”
इतना सुनते ही सेठजी अवाक् रह गए । वह झल्लाते हुए बोले “अरे अस्सी ही दे दो।”
भोला फिर मुस्कराते हुए बोला, “दस की ले ली लोटा बाल्टी दस की ले ली रस्सी, सेठजी अब काहे के अस्सी।”
सेठजी भोला की बातें सुनकर मन ही मन तिलमिला रहे थे गुस्से में उनका बुरा हाल था। वह बोले “साठ ही दे दो।”
भोला फिर आंखें मटकाते हुए बोला, “सुनो सेठ जी, दस के ले लिए इस्तर विस्तर, दस की ले ली खाट, सेठजी अब काहे के साठ।
सेठजी का बुरा हाल था। वह फिर बोले”भोला, कम से कम मेरे चालीस रुपए ही दे दो।”
भोला फिर बोला, “दस की ले ली जूता चप्पल, दस की ले ली पॉलिस, सेठजी अब काहे के चालीस।”
सेठ के पसीना छूट रहा था। वह बोले “कम से कम बीस ही दे दो।
भोला ने फिर आंखें मटकाते हुए कहा, “दस की ले ली कापी किताबें, दस की दे दी फीस। सेठजी अब काहे के बीस?”
यह सुनकर सेठजी को तो चक्कर आने लगे उन्होंने फिर कहा, भोला, कम से कम मुझे ब्याज ही दे दो।”
भोला फिर मुस्कराते बोला, “दस की ले ली सब्जी सब्जी, दस की ले ली मूँगफली, सेठजी अब काहे का ब्याज।”
इतना सुनते ही सेठजी के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह धड़ाम से नीचे गिर गए। भोला ने सेठ को बेईमानी का मज़ा चखा दिया था। सेठजी अपनी करनी पर पछता रहे थे।
*🔔🤗✍️महानुभावों, जिंदगी बीत गयीं लोगों को लूटते हुए।आप समझते है कि आपने लोगों को लूटा किंतु आपके कर्म कहते है कि आप स्वयं लूट गये।आपने जिनकों परेशान किया वह सभी जीव आपको 84 लाख योनियों मे ब्याज सहित परेशान करेंगे।अतः आप किसी के मोक्षमार्ग मे सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी कभी मत बनना।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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