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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒लाल जैनमंदिर दिल्ली*
*👨👩👧👦महानुभावों, ये दिल्ली के 'चांदनी चौक' प्रसिद्ध Jain Lal Temple मन्दिर की घटना है। ये लगभग 800 साल पुराना मन्दिर है।इसके बारे में कहते हैं। जब क्रूर, बेरहम, औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश अपने सिपाहियों को दिया तो, ये बात लाला सेठभागमलजी जैन को पता चली, जो बहुत बड़े व्यापारी थे।*
उन्होंने औरंगजेब की आंखों में आंखे डालकर ये कह दिया था कि तू अपना मुह खोल जितना खोल सकता है, बता तुझे कितना जजिया कर (टेक्स) चाहिए?????
औरंगजेब तू बस आवाज़ कर, लेकिन मन्दिर को कोई हाथ नही लगाएगा, मन्दिर की घण्टी बजनी बन्द नही होगी,
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कहते हैं उस वक़्त औरंगजेब ने औसत जजिया कर से 100 गुना ज्यादा जजिया कर हर महीने मांगा था, और लाला भागमल जी ने हर महीने, बिना माथे पर शिकन आये जजिया कर औरंगजेब को भीख के रूप में दिया था, लेकिन लाला जी ने किसी भी आततायी को मन्दिर को छूने नही दिया।
आजतक मन्दिर की घण्टियाँ ज्यों की त्यों बजती है।
मैने कन्वर्ट मुस्लिमो में लगभग हर जाति को हिन्दू से मुस्लिम कन्वर्ट पाया है, लेकिन मुझे ' जैनबनिया समाज के लोग कन्वर्ट आजतक नही मिले।
मैने देखा है,जैनबनिया लोग जहां भी जाकर बसते है, सबसे पहले वहां आसपास जितना जल्दी हो सके, एक भव्य दिगंबर जैनमंदिर का निर्माण दिल खोलकर करते हैं।
महाराणा प्रताप जी भी जब महल छोड़कर जंगल चले गए थे, तो उन्हें नई सेना बनाने के लिए, हथियारों घोड़ो, हाथियों के लिए, अकबर से युद्ध के लिए नई सेना का गठन करना था, उस समय भी जैनबनिया समाज से हम राजपुतों के आदरणीय रहे, स्वर्गीय श्री भामाशाह जी ने अकूत धनराशि से महाराणा प्रताप जी को भरपूर सहयोग किया था।
*वर्तमान समय में भारत सरकार को सम्पूर्ण भारत से मिलने वाले सौ प्रतिशत में से 30% टैक्स जैनियों की ओर से दिया जाता है।यह विशेषता सच्चे जैनधर्म की है।*
ऐसे ये दो नही अनगिनत...अनगिनत...अनगिनत.... किस्से हैं मेरे पास, जहां जैनबनियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर करके अपने धर्म की रक्षा की,
और बहुत से लोग इन्हें कंजूस कहकर इनका उपहास उड़ाते हैं , जो उपहास उड़ाते है, वो लोग उपहास उड़ाने से पहले, अपने गिरेबाँ में झांक कर, अपने त्याग और जैनबनियों के त्याग में अंतर कर लेना।
सनातन धर्म की नींव बचाने के लिए जैनबनिया समाज का समस्त हिन्दू धर्म सदैव ऋणी रहेगा।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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