रविवार, 17 अप्रैल 2022

जीवन की कहानी

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जीव की आसक्ति💐💐*
एक भ्रमर सायंकाल के समय एक कमल पर बैठकर उसका रस पी रहा था।  इतने में सूर्यास्त होने को आ गया। सूर्यास्त होने पर कमल सकुचित हो जाता है।  अत: कमल बंद होने लगा, पर रसलोभी मधुप विचार करने लगा - "अभी क्या जल्दी है, रात भर आनन्द से रसपान करते रहें - रात बीतेगी, सुन्दर प्रभात होगा, सूर्यदेव उदित होंगे,  उनकी किरणों से कमल पुन: खिल उठेगा, तब मैं बाहर निकल जाऊँगा।"  वह भ्रमर इस प्रकार विचार कर ही रहा था कि हाय ! एक जंगली हाथी ने आकर कमल को डंडी समेत उखाड़कर दाँतों में दबाकर पीस डाला। यों उस कमल के साथ भ्रमर भी हाथी का ग्रास बन गया। 
  
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इस प्रकार पता नहीं, कालरूपी हाथी कब हमारा ग्रास कर जाये। मृत्यु आने पर एक श्वास भी अधिक नहीं मिलेगा। मृत्युकाल आने पर एक क्षण के लिए भी कोई जीवित नहीं रह सकता। उस समय कोई कहे कि 'मैंने वसीयतनामा बनाया है। कागज  तैयार है, केवल हस्ताक्षर करने बाकी हैं।  एक श्वास से अधिक मिल जाय तो मैं सही कर दूँ।' पर काल यह सब नहीं सुनता। बाध्य होकर मरना ही पड़ता है। यही है हमारे जीवन कि स्थिति। अतएव मानव-जीवन कि सफलता के लिए हमें संसार के पदार्थों से ममता उठाकर सच्चे देव - शास्त्र - गुरु में ममता करनी चाहिए। हम प्राणी-पदार्थों में ममता बढ़ाते हैं, पर यह ममता स्वार्थमूलक है। स्वार्थ में जरा धक्का लगते ही यह ममता टूट जाती है।
       
इसीलिए भगवान् श्री रामचन्द्रजी विभीषण से कहते हैं -"माता, पिता, भाई, स्त्री, शरीर, धन, सुहृद, मकान, परिवार - सब की ममता के धागों को सब जगह से बटोर लो, ममता को धागा इसलिए कहा गया है कि उसे टूटते देर नहीं लगती।  फिर उन सब की एक मजबूत डोरी बट लो। उस डोरी से अपने मन को मेरे चरणों से बांध दो। अर्थात मेरे चरण ही तुम्हारे रहे, और कुछ भी तुम्हारा न हो। सारी ममता मेरे चरणों में ही आकर केन्द्रित हो जाय। ऐसा करने से क्या होगा ? ऐसे सत्पुरुष मेरे ह्रदय में वैसे ही बसते हैं, जैसे लोभी के ह्रदय में धन। अर्थात लोभी के धन की तरह मैं उन्हें अपने ह्रदय में रखता हूँ"। 
*👨‍👩‍👧‍👦अत: संसार के प्राणीयों-पदार्थों से रागद्वेष से लिपटी ममता हटाकर एकमात्र सच्चे देव - शास्त्र - गुरु   में ममता करे। समता की नाँव मे बैठकर सम्यग्दर्शन- सम्यकज्ञान- सम्यकचारित्र रुपी खेवटिया बनकर यह जीवन सफल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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