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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒मतभेद 💐💐*
*🕉️जैनदर्शन के अनुसार सम्यग्दर्शन के आठ अंग होते है।इन आठ अंगों में उपगूहन ओर स्थितिकरण इन दो अंगों के पालन करने वाले का सम्यग्दर्शन बना रहता है।*
*👨👩👧👦1.उपगूहन याने (घर, परिवार, समाज व विश्व मे रहने वाला व्यक्ति विशेष)साधर्मी के दोषों को ढकना।*
*🤗2. स्थितिकरण :- उसे जैनधर्म के अनुसार उसे स्थापित करना।कुछ लोग इन दोनों अंगों का पालन नहीं करते जिसके कारण वह धर्म की क्रियाओं को करने के बाद भी 84 लाख योनियों में भ्रमण करते है।*
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*🕉️जैनदर्शन के अनुसार सम्यग्दर्शन के आठ अंग होते है।इन आठ अंगों में उपगूहन ओर स्थितिकरण इन दो अंगों के पालन करने वाले का सम्यग्दर्शन बना रहता है।*
*👨👩👧👦1.उपगूहन याने (घर, परिवार, समाज व विश्व मे रहने वाला व्यक्ति विशेष)साधर्मी के दोषों को ढकना।*
*🤗2. स्थितिकरण :- उसे जैनधर्म के अनुसार उसे स्थापित करना।कुछ लोग इन दोनों अंगों का पालन नहीं करते जिसके कारण वह धर्म की क्रियाओं को करने के बाद भी 84 लाख योनियों में भ्रमण करते है।*
✍️महाभारत काल में जब पांडव वनवास काल में थे तो अपना जीवन एक कुटियाँ में रहकर बिता रहे थे जिसके बारे में जब दुर्योधन को पता चला तो उसने पांडवों को नीचा दिखाने के लिए पूर्ण ऐशवर्य के साथ वन में जाने की सोची ताकि वो पांडवो को इर्षा से जलता देख सके |
*👨👩👧👦🤝👩🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
👉जब दुर्योधन वन के लिए निकला | तब उसकी रास्ते में गंधर्वराज से मुलाकात हुई | उसी वक्त दुर्योधन ने सोचा कि गंधर्वकुमार को हराकर पांडवो को अपनी ताकत का प्रमाण देना का अच्छा मौका हैं | ऐसा सोच उन्होंने गंधर्व राज पर आक्रमण कर दिया लेकिन गन्धर्व राज अत्यंत शक्तिशाली थे | उन्होंने दुर्योधन को हरा दिया और उसे बंदी बना दिया | जब इसकी सुचना पांडवो को मिली तब युधिष्ठिर ने भाईयों को आदेश दिया कि वे जाकर दुर्योधन को वापस लायें | यह सुनकर भीम ने कहा – भ्राता ! यूँ तो दुर्योधन हमारा भाई हैं लेकिन वो सदैव हमारा अहित सोचता हैं तो ऐसे में उसकी मदद क्यूँ की जाये | तब युधिष्ठिर ने उत्तर दिया – भले ! हमारा और हमारे भाईयों का बैर हैं लेकिन वो एक घर की बात हैं जिसे जग जाहिर करना गलत हैं |पारिवारिक झगड़े परिवार में ही रहे उसी में परिवार की इज्जत हैं |इसे यूँ प्रदर्शित करना पूर्वजो का अपमान हैं |बड़े भाई की आज्ञा मान पांडव गंधर्वराज से युद्ध करते हैं और दुर्योधन को छुड़ा लाते हैं |
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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👉👨👩👧👦आज कल घर,परिवार, समाज में झगड़े बढ़ते ही जा रहे हैं लेकिन ये आम बात हैं परन्तु इनका बखान अन्य के सामने करना गलत हैं | इससे जग हँसाई होती हैं और आपके परिवार की कमजोरी सभी के सामने उजागर होती हैं |
👉👨👩👧👦घर,परिवार समाज में कितना ही बैर क्यूँ ना हो लेकिन विपत्ति में हमेशा अपनों का साथ देना चाहिये |
👩आजकल आम बात में घर परिवार समाज में मनमुटाव होना लेकिन अगर इसकी भनक दूसरों को लगती हैं तो वे आपका मजाक उड़ाते हैं | साथ ही इसका फायदा उठाकर आपको नुकसान भी पहुँचा सकते हैं |जिस तरह से अंग्रेजों ने आपसी मतभेद का फायदा उठाकर कई सालों तक हमारे देश पर राज किया |
🔔अगर आप घर,परिवार व समाज के झगड़ों की बाते अन्य के सामने करते हैं तो आपके बुजुर्गों एवम उनके संस्कारों पर लोग प्रश्नचिन्ह लगाते हैं जिससे परिवार की साख मिट्टी में मिल जाती हैं | अतः जहाँ तक कोशिश करें पारिवारिक मनमुटाव को परिवार में ही रहने दे उसका बखान कर परिवार की नींव कमज़ोर ना करें |
*👉🏿👨👩👧👦जिस प्रकार पाँचों पांडवों ने सम्यग्दर्शन के अंगों का पालन कर अपनी आत्मा को परमात्मा बनाया।उसी प्रकार हम भी सम्यग्दर्शन के अंगो का पालन करते हुए दुसरों के मोक्षमार्ग मे सहयोगी बनकर अपना मोक्षमार्ग प्रशस्त करें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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