रविवार, 3 अप्रैल 2022

दृढ़सकल्प

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒दृढसंकल्प  का फल*💐💐
बहुत पुरानी बात है एक जंगल एक गुरुकुल था जिसमें बहुत सारे बच्चे पढ़ने आते थे। एक बार की बात है ,गुरूजी सभी विद्यर्थियों को पढ़ा रहे थे मगर एक विद्यार्थी ऐसा था जिसे बार बार समझाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। गुरूजी को बहुत तेज से गुस्सा आया और उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा – ‘ जरा अपनी हथेली तो दिखाओ बेटा । विद्यार्थी ने अपनी हथेली गुरूजी के आगे कर दी। हथेली देखकर गुरूजी बोले – बेटा ! तुम घर चले जाओ ,आश्रम में रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है ।

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शिष्य ने पूछा – क्यों गुरूजी?
गुरूजी ने कहा – तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरूजी ने एक दूसरे विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए बोले – यह देखो ! यह है विद्या की रेखा । यह तुम्हारे हाथ में नहीं है । इसलिए तुम समय नष्ट ना करो , घर चले जाओ । वहां अपना कोई और काम देखो ।विद्यार्थी ने अपनी जेब से चाकू निकाल, जिसका प्रयोग वह दातुन काटने के लिए किया करता था । उसकी पैनी नोक से उसने अपने हाथ में एक गहरी लकीर बना दी । हाथ लहूुहान हो गया । तब वह गुरूजी से बोला – मैंने अपने हाथ में विद्या की रेखा बना दी है, गुरूजी। यह देखकर गुरूजी द्रवित हो उठे और उन्होंने उस विद्यार्थी को गले से लगा लिया ।गुरुजी बोले – तुम्हे विद्या सीखने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती ,बेटा! दृढ़ निश्चय और परिश्रम हाथ की रेखाओं को भी बदल देते है ।
वह विद्यार्थी आगे चलकर ‘ महर्षि पाणिनि’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जिसने विश्व प्रसिद्ध व्याकरण ‘ अष्टाध्याई ‘ की रचना की । इतनी सदिया बित जाने पर भी विश्व की किसी भी भाषा में ऐसा उत्कृष्ट और पूर्ण व्याकरण का ग्रंथ अब तक नहीं बना।

*👨‍👩‍👧‍👦👩‍🦰🤝👏👨‍👩‍👧‍👦महानआत्माओं, आज हम अपने जीवन में कामयाबी के शिखर पर नहीं पहुंचने का मुख्य कारण यह है कि हमारे अंदर दृढसंकल्प की कमी है।अतः आप वर्तमान समय से ही अपना जीवन का लक्ष्य तय करें।अपनी ऊर्जा को धर्म के सहारे अपने लक्ष्य को ध्यान रखते हुए कार्य करें।सफलता आपके पास होगी।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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