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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒हमारा प्रयास 💐💐*
*🔔🙏आज चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 14 अप्रैल 2022 इस भरत क्षेत्र के शासन नायक 1008 श्री महावीर स्वामी का 2021वाँ जन्म कल्याणक महा महोत्सव है।आप सभी अपनी शक्तिनुसार इसका लाभ ले।🙏🔔*
*👨👩👧👦महान आत्माओं, क्या आप जीवन मे लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो, कोई बात नहीं अब आप इस कहानी के माध्यम से अपनी दृढता को मजबूत करते हुए योगध्यान,भगवान की भक्ति व अपने सात्विक आहार के माध्यम से सफलता को प्राप्त करें।*
👉🏿एक समय की बात है। एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था। एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया।
राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उस पत्थर से भगवान की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मुख्य चैत्यालय मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया और प्रतिमा निर्माण का कार्य राज्य के महामंत्री को सौंप दिया।
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महामंत्री गाँव के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास गया और उसे वह पत्थर देते हुए बोला, “महाराज मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं। सात दिवस के भीतर इस पत्थर से भगवान की प्रतिमा तैयार कर राजमहल पहुँचा देना। इसके लिए तुम्हें 500 स्वर्ण मुद्रायें दी जायेंगी।”
500 स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार ख़ुश हो गया और महामंत्री के जाने के उपरांत प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के उद्देश्य से अपने औज़ार निकाल लिए। अपने औज़ारों में से उसने एक हथौड़ा लिया और पत्थर तोड़ने के लिए उस पर हथौड़े से वार करने लगा। किंतु पत्थर जस का तस रहा। मूर्तिकार ने हथौड़े के कई वार पत्थर पर किये। किंतु पत्थर नहीं टूटा।
कई बार प्रयास करने के उपरांत मूर्तिकार ने अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किंतु यह सोचकर हथौड़े पर प्रहार करने के पूर्व ही उसने हाथ खींच लिया कि जब बार- बार वार करने से पत्थर नहीं टूटा, तो अब क्या टूटेगा।
वह पत्थर लेकर वापस महामंत्री के पास गया और उसे यह कह वापस कर आया कि इस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन है। इसलिए इससे भगवान की प्रतिमा नहीं बन सकती।
महामंत्री को राजा का आदेश हर स्थिति में पूर्ण करना था। इसलिए उसने भगवान की प्रतिमा निर्मित करने का कार्य गाँव के एक साधारण से मूर्तिकार को सौंप दिया।
पत्थर लेकर मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही उस पत्थर की पूजा की ओर अपने गुरु का स्मरण करते हुए कुछ मन में दृढता पूर्वक सभी औजारों के साथ वह शुभ कार्य मे लग गया।
उस पर श्रद्धा पूर्वक हथौड़े से प्रहार किया और वह पत्थर उसके प्रयास से टूट गया।
पत्थर टूटने के बाद मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट गया। इधर महामंत्री सोचने लगा कि काश, पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास और किया होता, तो सफ़ल हो गया होता और 500 स्वर्ण मुद्राओं का हक़दार बनता।
*💐💐सीख💐💐*
*🔔महान आत्माओं, हम भी अपने जीवन में ऐसी परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं। कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं। कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं। जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता। यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती। क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाये।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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