*तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल सप्तमी , गुरुवार 6 मार्च 2025 कलि काल के अष्टम तीर्थंकर सर्व सुखकारी ओज तेज प्रदाता श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल शाश्वत पर्व अष्टमी, शुक्रवार 7 मार्च 2025 कलि काल के तृतीय तीर्थंकर सर्व सुखकारी मोक्ष प्रदाता श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎इस मार्च माह में 8 मार्च नवमी तिथि का क्षय होने से दसमीं तिथि होगी।11 व 12 मार्च को तेरस तिथि रहेगी।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 7 से 14 मार्च को है। सोलह कारण व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त मार्च माह में 1,2, 5,6, 7,12 व 14 मार्च को है। 🔔 गृह प्रवेश मुहूर्त 01,06 व 14 मार्च को है।।*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
आज हम सभी समझें कि हमारे घर में परेशानी क्यों रहती है इस कहानी में ...
*कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य*
15 साल के एक बच्चे ने अपने पापा से कहा, "पापा, दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे हैं। अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।"
उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी, लेकिन दीनदयाल जी पहले से ही चिंतित बैठे थे। उन्होंने गहरी सांस ली और बोले, "हाँ बेटा, उनका कल ही फोन आया था कि वे दहेज की बात करने आ रहे हैं... बड़ी मुश्किल से यह अच्छा रिश्ता मिला था। अगर उनकी मांग बहुत ज़्यादा हुई, तो मैं पूरी नहीं कर पाऊँगा।" कहते-कहते उनकी आँखें भर आईं।
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
घर में चिंता का माहौल था। बेटी भी उदास हो गई थी।
अगले दिन...
समधी-समधिन का घर में स्वागत किया गया। कुछ देर बाद लड़के के पिता बोले, "दीनदयाल जी, अब काम की बात हो जाए?"
दीनदयाल जी की धड़कन तेज हो गई। वे घबराते हुए बोले, "हाँ समधी जी, जो आप हुकुम करें।"
लड़के के पिता ने धीरे से उनकी कुर्सी के पास खिसकते हुए कहा, "मुझे 'दहेज' के बारे में बात करनी है।"
यह सुनते ही दीनदयाल जी के हाथ कांपने लगे। वे आँखों में पानी लिए हाथ जोड़कर बोले, "बताइए समधी जी, जो आपको उचित लगे, मैं पूरी कोशिश करूँगा।"
तब समधी जी ने उनका हाथ पकड़कर धीरे से कहा, "आप कन्यादान में कुछ भी दें या न दें, थोड़ा दें या ज़्यादा दें, मुझे कोई आपत्ति नहीं... लेकिन कृपया कर्ज लेकर एक रुपया भी मत देना। वह मुझे स्वीकार नहीं। जो बेटी अपने पिता को कर्ज में डुबो दे, वैसी ' *कर्ज वाली लक्ष्मी* ' मुझे नहीं चाहिए। मुझे ऐसी बहू चाहिए जो मेरे घर आकर मेरी संपत्ति को दोगुना कर दे, न कि पिता का सिर झुका दे।"
यह सुनते ही दीनदयाल जी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। वे भावुक होकर समधी जी से गले लग गए और बोले, "समधी जी, आपने तो मुझे चिंता मुक्त कर दिया। सच कहूँ, अगर हर पिता को आपके जैसे समधी मिल जाएँ, तो कोई भी बेटी के विवाह को लेकर चिंतित न रहे। आपके विचार न केवल मेरे लिए, बल्कि समाज के लिए भी मिसाल हैं। काश, सभी लोग इसी सोच को अपनाएँ, तो हर बेटी अपने घर से मुस्कुराते हुए विदा होगी, न कि अपने पिता के कर्ज की बोझ तले दबकर।"
समधी जी भी मुस्कुराते हुए बोले, "बेटियाँ लक्ष्मी होती हैं, लेकिन हमें ऐसी लक्ष्मी चाहिए जो घर-परिवार को संवारने आए, न कि पिता को कर्ज में डुबोने की वजह बने। हमें अपने समाज को यह समझाना होगा कि दहेज का लेन-देन सिर्फ एक गलत परंपरा ही नहीं, बल्कि कई परिवारों के दुख का कारण भी है। जब हम इसे रोकेंगे, तभी बेटियों का सम्मान और माता-पिता की इज्जत बरकरार रह पाएगी।"
आज दीनदयाल जी को न सिर्फ एक अच्छा समधी मिला था, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला एक सच्चा मार्गदर्शक भी।
> *विशेष: - भव्य आत्माओं यह एक सच्चाई है कि जिस घर में कर्ज वाली बहू जाती है वह घर में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए आप सभी के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि "कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करे और ना ही कोई स्वीकार करे!" यदि समाज इस सोच को अपनाए, तो हर बेटी अपने घर से खुशी-खुशी विदा होगी, और कोई भी पिता अपनी संतान के ' विवाह के लिए कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर नहीं होगा। इससे मायके व ससुराल पक्ष में दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें