*🎪 सिध्दम नमः 🎪*
*🐎तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी🙏*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 ईश्वर की सच्ची भक्ति – कर्म करना या मंदिर जाना? ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण शाश्वत पर्व अष्टमी, शनिवार 22 मार्च 2025 कलि काल के 10 वें तीर्थंकर शीतलता प्रदान करने की शक्ति प्रदाता श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण नवमी, रविवार 23 मार्च 2025 कलि काल के प्रथम तीर्थंकर सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 28 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨👨👦👦🔔👉 14 मार्च शाम 6:50 से मल मास प्रारंभ होने से शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर 14 अप्रैल तक पाबंदी रहेगी । 🔔*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*ईश्वर की सच्ची भक्ति – कर्म करना या मंदिर जाना?*
एक गांव में एक पुजारी थे, जो अपनी भक्ति, मधुर वाणी, और हर किसी के प्रति सम्मान के लिए प्रसिद्ध थे। वह प्रतिदिन मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक भगवान की पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करते थे। लोग उनकी भक्ति को देखकर उन्हें बहुत मानते और अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए उनके पास आते।
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एक ओर, उसी गांव में एक तांगेवाला रहता था। उसकी आजीविका तांगा चलाने पर निर्भर थी, और उसे अपना बड़ा परिवार भी पालना था। वह ईश्वर में आस्था रखता था, परंतु काम में व्यस्त रहने के कारण मंदिर नहीं जा पाता था। यह बात उसे भीतर ही भीतर कचोटती थी। उसे लगता था कि वह ईश्वर से दूर हो गया है और उसका यह ‘पाप’ उसे नरक का भागी बना देगा।
एक दिन वह अपनी इस समस्या के साथ मंदिर पहुंचा। पुजारी के पास जाकर उसने कहा,
"पुजारी जी, मैं सुबह से शाम तक तांगा चलाता हूं। परिवार पालने की जिम्मेदारी के कारण मुझे मंदिर आने का समय नहीं मिलता। पूजा-पाठ तो दूर की बात है। मुझे डर है कि इस कारण ईश्वर मुझसे नाराज़ हो जाएंगे। क्या मैं तांगा चलाना छोड़कर रोज मंदिर में पूजा शुरू कर दूं?"
पुजारी ने तांगेवाले की आंखों में अपराधबोध और डर देखा। उन्होंने शांत स्वर में पूछा,
"तुम्हारे तांगे में कभी ऐसा हुआ है कि तुमने किसी बूढ़े, अपाहिज, या जरूरतमंद को बिना पैसे लिए अपनी गाड़ी में बिठा लिया हो?"
तांगेवाले ने सिर झुकाकर कहा,
"जी हां, ऐसा कई बार हुआ है। जब भी कोई जरूरतमंद दिखता है, तो मैं उसे अपने तांगे में बैठा लेता हूं, चाहे वह पैसे दे पाए या नहीं।"
यह सुनकर पुजारी मुस्कुराए और बोले,
"तुम्हें अपना काम बंद करने की आवश्यकता नहीं है। *जरूरतमंदों की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।* जिनके मन में दया और सेवा की भावना है, उनके लिए पूरा संसार ही मंदिर है।"
पुजारी ने समझाया,
"मंदिर में आने की जरूरत उन लोगों को होती है, जो अपने कर्मों से ईश्वर की प्रार्थना नहीं कर पाते। लेकिन तुम तो अपनी सेवा और दया से पहले ही ईश्वर के करीब हो। ईमानदारी से अपने परिवार का भरण-पोषण करना और दूसरों की मदद करना, यही सच्ची पूजा है। यदि तुम यह काम छोड़ दोगे, तो ईश्वर को प्रसन्नता नहीं होगी।"
*👨👨👦👦🌞🐎🔔⛳विशेष:-भव्य आत्मन, :सच्ची भक्ति पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। दूसरों के प्रति करुणा, सेवा, और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना ही ईश्वर की सच्ची उपासना है। मंदिर जाना आत्मिक शांति के लिए है, पर संसार के जीवों की सेवा करना ईश्वर की सेवा करना ही है। मंदिर जी हम सभी को भगवान के गुणों की प्राप्ति के लिए आराधना करनी चाहिए।🔔 मंदिर जी आकर भगवन्तों की पूजा पाठ व भक्ति से हमें अभिमान आता है तो अभी हमारी श्रद्धा में कमी है।*
*👨👨👦👦"सतकर्म ही पूजा है, और सच्ची सेवा ही सच्ची भक्ति।"🐎*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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