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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 पद का महत्व ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष शुक्ल चौदस दिनांक पांच जनवरी 2023 गुरुवार को चतुर्थ तीर्थंकर सभी को चतुरता प्रदान करने वाले 1008 श्री अभिनंदननाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव हैं।तीर्थंकर अभिनन्दन नाथ जी का है ज्ञान कल्याणक , शाश्वत नगरी अयोध्या जी में हुआ था | आज के ही दिन संध्या के समय पुनर्वसु नक्षत्र में शाल वृक्ष के नीचे केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी |*
*🕉️2. पौष शुक्ल पूर्णिमा दिनांक 6 जनवरी 2023 शुक्रवार को 15वें तीर्थंकर सभी को सत्य धर्म प्रदान करने वाले 1008 श्री धर्मनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव हैं।*
*👨👩👦👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*
पिता अपने बेटे के साथ पांच-सितारा होटल में प्रोग्राम अटेंड करके कार से वापस जा रहे थे। रास्ते में ट्रेफिक पुलिस हवलदार ने सीट बैल्ट नहीं लगाने पर रोका और चालान बनाने लगे।
पिता ने सचिवालय में अधिकारी होने का परिचय देते हुए रौब झाड़ना चाहा तो हवलदार जी ने कड़े शब्दों में आगे से सीट बैल्ट लगाने की नसीहत देते हुए छोड़ दिया। बेटा चुपचाप सब देख रहा था।
रास्ते में पिता "अरे मैं आइएएस लेवल के पद वाला अधिकारी हूं और कहां वो मामूली हवलदार मुझे सिखा रहा था, मैं क्या जानता नहीं क्या जरुरी है क्या नहीं, बडे अधिकारियों से बात करना तक नहीं आता, आखिर हम भी जिम्मेदारी वाले बड़े पद पर हैं भई !!" बेटे ने खिड़की से बगल में लहर जैसे चलती गाडियों का काफिला देखा, तभी अचानक तेज ब्रेक लगने और धमाके की आवाज आई।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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पिता ने कार रोकी, तो देखा सामने सड़क पर आगे चलती मोटरसाइकिल वाले प्रोढ़ को कोई तेज रफ्तार कार वाला टक्कर मारकर भाग गया था। मौके पर एक अकेला पुलिस का बूढ़ा हवलदार उसे संभालकर साइड में बैठा रहा था।
खून ज्यादा बह रहा था, हवलदार ने पिता को कहा "खून ज्यादा बह रहा है मैं ड्यूटि से ऑफ होकर घर जा रहा हूं और मेरे पास बाईक नहीं है, आपकी कार से इसे जल्दी अस्पताल ले चलते हैं, शायद बच जाए।"
बेटा घबराया हुआ चुपचाप देख रहा था। पिता ने तुरंत घर पर इमरजेंसी का बहाना बनाया और जल्दी से बेटे को खींचकर कार में बिठाकर चल पड़ा।
बेटा अचंभित सा चुपचाप सोच रहा था कि बड़ा पद वास्तव में कौन सा है !! पिता का प्रशासनिक पद या पुलिस वाले हवलदार का पद जो अभी भी उस घायल की चिंता में वहां बैठा है...
अगले दिन अखबार के मुख्य पृष्ठ पर कोने में दुर्घटना में घायल को गोद में उठाकर 700 मीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले हवलदार की फोटो सहित खबर व प्रशंसा छपी थी। बेटे के होठों पर सुकुन भरी मुस्कुराहट थी, उसे अपना जवाब मिल गया था।
इंसानियत का मतलब सिर्फ खुशियां बांटना नहीं होता… बड़े पद का असली मतलब अपने पास आई चुनौतियों का उस समय तक सामना करना होता है, जब तक उसका समाधान नहीं हो जाता। उस समय तक साथ देना होता है जब वो मुसीबत में हो, जब उसे हमारी सबसे ज्यादा ज़रुरत हो… इसलिए हमें कभी भी अपने पद का घमंड नहीं करना चाहिए, हर समय मदद के लिए तैयार होकर अपने पद की गरिमा बनानी चाहिए..!
*⏰👪🔔विशेष:-भव्य आत्माओं, आज यह पोस्ट सभी भारतवासियों को समझने के लिए है। आज राजनीति हो, सामाजिक हो, पारिवारिक हो या जातिवाद हो इन सभी जगहों के पदाधिकारियों को यह एहसास होना चाहिए कि आज हमें जो पद प्राप्त हुआ है वह एक हमारी जवाबदारी है कि हम ईमानदारी व निष्ठा पूर्वक सभी के लिए आवश्यक लड़ाई में सहयोगी बनें रहेंगे। अतः जो भी पद पर रहकर कार्य करने में असमर्थ हो उस व्यक्ति विशेष ने त्वरित अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।इस प्राचीन पद्धति से ही पारिवारिक, सामाजिक व देश के साथ विश्व का सर्वांगीण विकास संभव है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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