रविवार, 8 जनवरी 2023

मेरा दोस्त

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा दोस्त ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में 13,19,20,21,23,25व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार की बात है, दो दोस्त एक साथ रेगिस्तान से गुजर रहा था। जाते जाते रस्ते में दोनों के बीच एक संवाद को लेकर बहस हुई। उस बात को लेकर एक दोस्त ने गुस्से में आकर दूसरी दोस्त को थप्पड़ मारा।

जिसने मार खाई उसे बहुत ही गुस्सा किया, उसकी गालों पे चोट लगी थी। उसने बिना कुछ कहें रेत पर लिखा “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।”

फिर दोनों दोस्तों ने रेगिस्तान में चलना शुरु किया। तब तक चलते रहे जब तक दोनों को रेगिस्तान में पानी नहीं मिला। कुछ दूर चलने के बाद दोनों को एक नदी दिखी, फिर दोनों ने नहाने का फैसला किया।

दोनों दोस्त जाकर पानी में नहाने लगे। थोड़ी देर बाद जिसने थप्पड़ खाया वह पानी में फँस गया और डूबने लगा तब दुसरे दोस्त ने उसे बचा लिया। उसने नदी से बाहर आकर एक पत्थर पर लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।”

जिस दोस्त ने थप्पड़ मारा था उसने दूसरे दोस्त को पुछा, “मैंने तुम्हें चोट पहुंचाया तो बाद में तुमने रेत पे लिखा। और जब मैं तुम्हें पानी में डूबते हुए बचाया तो तुमने क्यों एक पत्थर पर लिखा?”

दूसरे दोस्त ने जवाब दिया, “जब तुम हमें चोट पहुंचाए तब मैंने रेत पर लिखा था क्यूंकि अगर जोर से हवा आई तो लिखा मिट जायेगा। जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करे तो तब हम पत्थर पर लिखे क्यूंकि पत्थर में लिखे को कोई भी हवा मिटा नहीं सकती।” उसके बाद दोनों दोस्त बात करते करते अपने घर चले गए।

*⏰✅🪔👪🙏विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी के साथ भी अनेक प्रकार की घटनाएं होती है। उनमें से हमारे जीवन में जो भी व्यक्ति विशेष सहायक बना है उसे हमेशा याद रखना चाहिए। हमारे साथ जो भी आज तक बुरा हुआ है उसे तत्काल भूल कर सावधान रहना चाहिए। हमनें किसी की मदत की है उसे किसी से बार बार नहीं कहना चाहिए,बार बार कहने से हमारा पुण्य समाप्त हो जाता है। कहावत भी है कि बंद मुट्ठी लाख की खुल गई तो खाक की। शेष शुभम भवतु*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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