शनिवार, 28 जनवरी 2023

संस्कृति व देश की सुरक्षा

**
🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒संस्कृति व देश की सुरक्षा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 10 , मंगलवार दिनांक 31 जनवरी  2023 को दूसरे तीर्थंकर सभी को विशालता प्रदान करने वाले  अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। तीन तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

राजस्थान के झुंझुनूं जिले का छोटा सा गांव था नयासर । शहर के कोलाहल से बहुत दूर , यहां शान्ति ही शान्ति थी । नंदाराम कस्वां अपने माता पिता और दो बडे भाईयो के साथ रहता था । बचपन मे उसने अपनी दादी जी से अपने दादा जी के फौज के बहुत से किस्से सुने हुए थे । बचपन मे मन बहुत कोमल होता है जो भी बात बैठ जाये , वह आजीवन नही निकलती । 
उसने भी बचपन मे ही प्रण ले लिया था कि वह भी अपने दादा जी की तरह फौज मे जाकर सेवा करेगा । उसका वह जोश उम्र के साथ साथ बढता गया । 

जबकि अन्य दोनो बडे भाई अपने पिता के साथ खेती करते थे ।
नंदाराम कस्वां का सपना पूरा हो गया , वह कठिन परीक्षा मे पास होकर फौज मे भर्ती हो गया और देश की सेवा करने लगा । फौज मे छुट्टी तो यदा कदा ही मिलती है ।

बडे दोनो भाई अपनी घर ग्रहस्थी मे लग गये । दोनो भाईयो के बच्चे भी हो गये । एक बार नंदाराम कस्वां मात्र पन्द्रह दिन की छुटटिया लेकर घर आ पाया , क्योंकि उसकी माता की तबियत बहुत खराब थी । 
उसकी मां ने पहले से उसके लिए एक रिश्ता देख रखा था । उन्हे अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा था कि नंदाराम कस्वां मना नही करेगा । उसके आने के अगले ही  तीन दिन मे उसका विवाह एक सुशील लडकी इमरती देवी के साथ कर दिया । दस दिन ही दोनो ने साथ बिताये थे कि ड्युटी पर जाने का समय हो गया ।
वह खुशी खुशी अपने परिवार से विदा ले चला गया । दो महीने बाद वही उसे पता चला कि वह पिता बनने वाला है । परंतु सरहद पर गम्भीर स्थिति के कारण वह नही आ पाया ।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने सोचा कि बच्चे के जन्म के समय चला जायेगा ,परन्तु उस समय भी दुश्मनो के हमले की आशंका के कारण छुटटी नही मिल पायी ।
जब उसका बालक रघुवीर सिंह छः महीने का हुआ तो वह उसके लिए बहुत से खिलौने और कपडे लिए, एक महीने की छुट्टी लेकर घर आया । अभी तीन दिन ही हुए थे , वह तो अपने बालक को अच्छे से प्यार करके अपने अरमान भी पूरे नही कर पाया था कि इमर्जेंसी के कारण नंदाराम कस्वां  को पुनः जाना पडा ।
इसके बाद वह दो साल बाद एक हफ्ताह की छुटटी लेकर घर आया । बच्चे बहुत मासूम होते है  जब घर मे वह अपने दोनो ताऊ जी के बेटो को लाड लडाते देखता तो उसका मन भी करता कि उसके पिता जी हर समय उसके साथ रहकर उसे प्यार करे । जब वह अपनी मां के अलावा अन्य स्त्रियो को सजे सवंरे और चहकते हुए , मगंलगीत गाते दगाता तो उसका मन करता कि काश उसकी मां भी ऐसे ही चहकती रहे । उसे भी अपनी मां और पिता का प्यार एक साथ मिले । वह छः वर्ष का हो चुका था , पिता का स्नेह और गोद उसे   न के बराबर ही मिली थी । एक दिन जब उसने सीमा पर हमले के कारण अपने दादा- दादी और मां के मुख पर चिंता देखी तो वह रात को घबराकर छत पर चला गया । उसने अपनी दादी से सुन रखा था कि टूटते तारो को देखकर कुछ भी मांगों वह पूरा हो जाता है । 
वह लगातार आकाश की तरफ देखता रहा फिर अचानक खुद से ही बोलने लगता है कि काश एक अनोखी दुनिया हो जाये । न कोई सरहद हो , न सीमा , सारी दुनिया मे प्यार हो जाये । जब ऐसा हो जायेगा तो सब आराम से रहेंगे। न लडाई होगी , न झगडा । उसके पिता भी घर पर होगे । वह भी अपने पिता की उगंली पकड खेतो मे जाया करेगा । जब भी घर के बाहर से उसके पिता आयेगे , उसे बाहों मे भर लेगें उसे फिर कंधे पर बैठा , पूरा गांव घुमायेगे । उसकी मां भी सज सवंर हर समय मंगलगीत गायेगी । दादा - दादी भी फिर चैन से सो पायेगे । 
फिर अगले दिन खबर मिली कि बेटा फ़ौज में शहीद हो गया।जब गांव में पार्थिव देह पहुँची तो बेटे ने देखा पूरा शहर उसके पिता नंदाराम कस्वां की पार्थिव देह के चारों तरह इक्कट्ठे होकर जयकारे लगा रहे है।अंतिम संस्कार के समय जब पिता को अग्नि देने का समय आया तो बेटे ने पिता को सेल्यूट करके जोर से जय हिंद कहकर शपथ ली कि वो भी बड़ा होकर देश की सेवा करेगा और पापा की तरह फौजी बनेगा।पूरा गांव ,शहर बच्चें की बहादुरी की तारीफ करते हुए आंसुओ की नदियां बहा रहे थे।

काश एक ऐसी अनोखी दुनिया सच मे बन जाये , चारों ओर हो अमन और शान्ति। हर बेटे रघुवीर को मिले सके पिता नंदाराम कस्वां और माता इमरती देवी का प्यार एक साथ। 

ऐसे परिवारो को कोटि नमन जो अपने घर के चिरागो को बारूद के ढेर पर भेजकर , देशसेवा मे अपना योगदान देते है ।

*🔔🪔👪🎪⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम बिना किसी विकल्पों के धर्म अर्थ काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ को निर्विकल्प कर पा रहे है।उसका मुख्य कारण यह है कि भारत की सीमाओं पर चौबीस घंटे इस धरती मां व सभी भारतवासियों की सुरक्षा के लिए सैनिक सेवा कर रहे है। अतः हमें भी अपनी संस्कृति व देश की सुरक्षा में सहयोगी बनना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें