बुधवार, 18 जनवरी 2023

उपकारी का उपकार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 उपकारी का उपकार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🐒नोट:-तेरस तिथी का क्षय है।*
*🕉️1. माघ कृष्ण  बारस दिनांक 19  जनवरी  2023  गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री    शीतलनाथ भगवान जी का जन्म व तप   कल्याणक  महोत्सव हैं।तीर्थंकर शीतलनाथ जी का है जन्म तथा तप भूमि श्री ईटखोरी ( भद्दलपुर ) कोल्हुआ पहाड़ पर हुआ था | सभी वृक्ष ओस से आच्छादित थे, सूर्योदय होते ही ओस नष्ट – वैराग्य हुआ, संध्या के समय पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जिन दीक्षा ली |यह पहाड़ गया जी के पास उत्तरप्रदेश में स्थित है।*
*🕉️2. माघ कृष्ण चौदस दिनांक 20 जनवरी  2023  शुक्रवार  को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव सभी को संस्कार प्रदान करने वाले   1008 श्री ऋषभदेव  भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 21, 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

एक वन में एक ऋषि रहते थे। उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था। यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था। जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता। यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था। लेकिन कुत्ते-बिल्ली और चील-कौवे आदि से वह सदा डरा-डरा और सहमा हुआ सा रहता।

एक बार ऋषि के मन में उस चूहे के प्रति बहुत दया आ गयी। वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा-सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए। ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके। ऋषि बहुत बड़ी दैवीय शक्ति के स्वामी थे। उन्होंने अपनी शक्ति के बल पर उस चूहे को शेर बना दिया और सोचने लगे कि अब यह चूहा किसी भी जानवर से नहीं डरेगा और निर्भय होकर पूरे जंगल में घूम सकेगा।

लेकिन चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई।वह सारे वन में बेधड़क घूमता। उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे। उसकी जय-जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है, वास्तव में शेर नहीं है।

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अतः ऋषि उससे चूहा समझकर ही व्यवहार करते।यह बात चूहे को पसंद नहीं आई कि कोई भी उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे। वह सोचने लगा की ऐसे में तो दूसरे जानवरों पर भी बुरा असर पड़ेगा। लोग उसका जितना मान करते हैं, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे।

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को ही मार डालूं,फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी। यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा। ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये।उनको शेर पर बड़ा क्रोध आ गया।

अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए  ऋषि ने अपनी दैवीय शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया।अंत मे चूहा अपने व्यवहार केलिए शर्मिदा हुआ।

 हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए। हमें उन लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है। इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए।चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता। बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है..!!

*विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी के जीवन में हमारे उपर अनेक लोगों के उपकार है। अगर हम उन उपकारों को भूलकर अभिमान करते है तो हमारे कर्म ही हमारी असलीयत सभी के सामने प्रगट कर देंगे। अतः हमें कभी भी किसी व्यक्ति विशेष ने हमारे उपर उपकार किया है तो उसे भूलना नहीं चाहिए,उस प्रकार का उपकार अन्य लोगों पर करके ऋण मुक्त होना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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