मंगलवार, 31 जनवरी 2023

भारतीय संस्कृति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भारतीय संस्कृति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 12 ,  गुरुवार दिनांक 2 फरवरी  2023 को चौथे तीर्थंकर सभी की चंचलता समाप्त करने वाले अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

*हम हाथ से खाना क्यों खाएं.?*
*जानिये वैज्ञानिक कारण...*
*अंग्रेज, नकलची नहीं, भारतीय बनें...*

अधिकतर भारतीय अपने हाथों से खाना खाते हैं। लेकिन आजकल हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए चम्मच और कांटे से खाना शुरू कर दिया है।
*लेकिन क्या आप जानते हैं.?*
*कि अपने हाथों से खाना खाने के स्वास्थ्य से संबंधित कई फायदे हैं.!*
यह आपके प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है.!
आयुर्वेद में कहा गया है, कि हम सब पांच तत्वों से बने हैं जिन्हें जीवन ऊर्जा भी कहते हैं, और ये पाँचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं...

■ आपका अंगूठा अग्नि का प्रतीक है,
■ तर्जनी अंगुली हवा की प्रतीक है,
■ मध्यमा अंगुली आकाश की प्रतीक है,
■ अनामिका अंगुली पृथ्वी की प्रतीक है और
■ सबसे छोटी अंगुली जल की प्रतीक है..!
इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम अँगुलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और
यह जो मुद्रा है... यह मुद्रा विज्ञान है.!
यह मुद्रा का ज्ञान है और इसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता निहित है।
इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है
और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे "प्राणाधार" की "एनर्जी" को "संतुलित" रखता है।

*भोजन में हरी मिर्च खाने से होते हैं अचूक स्वास्थ लाभ..*

*इससे पाचन में सुधार होता है:*
टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है।
जब हम हाथों से खाना खाते हैं
तो हमारा मस्तिष्क हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं।
इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है जिससे पाचन क्रिया सुधरती है।

*इससे खाने पे दिमाग लगता है:*
हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है।
इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है।
इसे माइंडफुल ईटिंग भी कहते है और यह मशीन की भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है।
माइंडफुल ईटिंग के कई फायदे हैं
इनमे से सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे खाने के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और यह आपको स्वस्थ रखता है।
यह आपके मुह को जलने से बचाता है,
आपके हाथ एक अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं।
जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और
यदि यह ज्यादा गर्म होता है तो आप इसे मुह में नहीं लेते हैं।
इस प्रकार यह आपकी जीभ को जलने से बचाता है।

*🎤🌲🐥🐋✍️विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी पुरानी संस्कृति को भूला रहें है इसके कारण से अनेक बीमारीयों का घर अपने शरीर को बना लिया है।हम सभी को अपनी प्राचीन संस्कृति की मर्यादाओं जीवित रखते हुए जीवन सार्थक करना चाहिए।एक बार कोशिश करके तो देखें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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