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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒एकता का परिणाम ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🐒नोट:-तेरस तिथी का क्षय है।*
*🕉️1. माघ कृष्ण बारस दिनांक 19 जनवरी 2023 गुरुवार को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले 1008 श्री शीतलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव हैं।तीर्थंकर शीतलनाथ जी का है जन्म तथा तप भूमि श्री ईटखोरी ( भद्दलपुर ) कोल्हुआ पहाड़ पर हुआ था | सभी वृक्ष ओस से आच्छादित थे, सूर्योदय होते ही ओस नष्ट – वैराग्य हुआ, संध्या के समय पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जिन दीक्षा ली |यह पहाड़ गया जी के पास उत्तरप्रदेश में स्थित है।*
*🕉️2. माघ कृष्ण चौदस दिनांक 20 जनवरी 2023 शुक्रवार को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव सभी को संस्कार प्रदान करने वाले 1008 श्री ऋषभदेव भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव हैं।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 21, 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨👩👦👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*
किसी जंगल में एक शेर रहता था जिससे सभी पशु-पक्षी बहुत डरते थे। शेर किसी एक जानवर को मार कर अपना पेट भरता था। उसी जंगल में खरगोश, कछुआ, बंदर और हिरण, ये चारों पक्के और सच्चे दोस्त थे, जो हमेशा हर जानवर की मदद करने को तैयार रहते थे।
एक दिन एक भेड़िया उस जंगल में पहुंचा। रास्ते में उसे भालू मिला। भालू ने उसको जंगल के सारे कायदे कानून बताए कि यहां का राजा शेर एक जानवर को मारकर खाता है, उससे बच कर रहना। चालाक भेड़िये ने सोचा, शेर से मित्रता करके उसका हितैषी बनकर, उसका दिल जीतना चाहिए, इससे मेरी जान तो बच जाएगी।
भेड़िया शेर की गुफा में गया और सोए हुए शेर के पास बैठ गया। शेर नींद से जब जागा तो भेड़िए को खाने को उद्यत हुआ। भेड़िए ने कहा, महाराज, पशुलोक से पशु देवता ने आपकी सेवा के लिए मुझे भेजा है। अब आपको शिकार पर जाने की जरूरत नहीं। आज से आपको मैं शिकार लाकर दूंगा। शेर ने भेड़िए की बात मान ली।
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भेड़िए ने जंगल में यह ढिंढोरा पिटवाया कि मैं पशुलोक से राजा शेर का सेवक बन कर आया हूं। जंगल के राजा की भूख मिटाने के लिए एक प्राणी मेरे साथ चलेगा। जंगल के सभी जानवर डर गए और भेड़िए की बात मानने को तैयार हो गए।
शेर के पास जाने के क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आई और भेड़िया उसे ले जाने लगा। तभी वहां हिरण, बंदर और कछुआ भी आ पहुंचे और उसके साथ जाने की जिद करने लगे। शेर के सामने पहुंचकर चारों ने बारी-बारी अपनी बात शेर से कहीं। सबसे पहले खरगोश बोला, महाराज आज आप मेरा भोजन किजीए। कछुआ बोला, नहीं महाराज आप अकेले खरगोश को नहीं खाइए, मुझे भी खाइए। तभी बंदर कहता है, महाराज इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं बड़ा हूं, मुझे अपना भोजन बना लीजिए। इतने में हिरण बोल पड़ा, महाराज, इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं अकेला ही तीनों के बराबर हूं, आप मुझे अपना शिकार बना लीजिए।
भेड़िया यह सब सुन रहा था। उसने कहा, महाराज, देर ना करें इन चारों की बातों में ना आए, एक झटके में इनको खत्म करके अपनी भूख मिटायें। तभी शेर ने चारों को अपने पास बुलाया और कहा, मैं तुम्हारी सच्ची एकता, मित्रता और त्याग देख कर बहुत खुश हुआ। यह कह कर शेर ने भेड़िए को अपना शिकार बना दिया।
किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए आपसी एकता होना बहुत जरूरी है। एकता के लिए चाहिए आपसी स्नेह और विश्वास। स्नेह के आधार से ही सहयोगी बन पाते हैं। सहयोगी बनने के लिए अपने को मिटाना पड़ता है अर्थात् अपने पुराने संस्कारों को मिटाना होता है। इसलिए आप हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करते रहो..!!
*🔔👨👩👦👦💯✍️विशेष:-भव्य आत्माओं, आज हमारे पतन का मुख्य कारण यह है कि हमारे परिवार, समाज, राष्ट्र व विश्व में एकता के अभाव में एक दुसरे के विकास में बाधक बनें हुए है। अतः हमें आज से ही अपने परिवार व समाज में एकता के लिए स्वयं को समर्पित करना होगा। वरना आज देश व विदेश की हालत आप सभी जानते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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