शुक्रवार, 6 जनवरी 2023

ध्यान से....

**
🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 ध्यान से....✍️🐒*

एक बार गुरुकुल में एक नया शिष्य आया । आश्रम के नियमानुसार उसे भी प्रतिदिन प्रातः काल– उपासना करनी होती थी । ध्यान प्रतिदिन का अभिन्न अंग है  लेकिन नये शिष्य का ध्यान बिलकुल नहीं लगता था ।

कुछ दिन तो वह जबरदस्ती आंखे बंद करके बैठा रहा लेकिन अंततः एक दिन उसके सब्र का बांध टूट गया । वह तुरंत उठकर अपने गुरुदेव के पास गया और बोला – “ गुरुदेव ! ये प्रातः काल में ध्यान की क्या आवश्यकता है ? 

गुरुदेव बोले – “ वत्स ! ध्यान मन को साधने के लिए अनिवार्य है ।”

शिष्य बोला – “ किन्तु गुरुदेव ! क्या मन को साधना जरुरी है ? मेरा मन तो ध्यान में बिलकुल नहीं लगता ”
 
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

गुरुदेव बोले – “ मन को साधना इसलिए जरुरी है क्योंकि मन चंचल है । चंचल मन से किसी भी कार्य को सिद्ध नहीं किया जा सकता इसलिए मन की चंचलता पर काबू पाना जरुरी है ।”

शिष्य बोला – “ किन्तु गुरुदेव ! मन चंचल क्यों है ?” शिष्य का प्रश्न सहज था किन्तु उसका उत्तर उतना सरल नहीं था । वास्तव में इस एक ही प्रश्न में सम्पूर्ण योग का सार छुपा हुआ है ।

गुरुदेव बोले – “ एक बात बताओ ! जिस मनुष्य के पास रहने के का कोई ठिकाना न हो, वह क्या करेंगा ?”

शिष्य बोला – “ गुरुदेव ! दर – दर भटकता फिरेगा, जब तक की उसे रहने के कोई ठिकाना नहीं मिल जाता ।”

गुरुदेव बोले – “ बस यही कारण है कि मन चंचल है । मन चंचल इसीलिए है, क्योंकि उसके पास ठहरने के कोई स्थाई ठिकाना नहीं । कोई ऐसी जगह नहीं, जहाँ उसे असीम और अनंत आनंद की अनुभूति हो सके । जहाँ पहुँचकर उसे कहीं और पहुँचने की आवश्यकता न हो । ऐसा स्थान केवल एक ही है और वह है – परम आनंद भगवान "

*⏰🌞👪🎪🔔विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, हम सभी को प्रतिदिन प्रातः काल भगवान के गुणों का चिंतवन करना चाहिए। रात्रि विश्राम से पहले अपने द्वारा की गई समस्त प्रकार की गलती की भगवान से क्षमा याचना करते हुए उन्हें दुबारा नहीं करने का संकल्प करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें