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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरी धर्मपत्नी ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र कृष्ण नवमी , गुरुवार दिनांक 16 मार्च 2023 को प्रथम तीर्थंकर सभी को सुसंस्कार प्रदाता ऋषभनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। तीर्थंकर ऋषभ देव जी का है जन्म कल्याणक , शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल उत्तम लग्न में मातारानी मरुदेवी ने तीर्थंकर को जन्म दिया था | तीर्थंकर ऋषभ नाथ जी का है तप कल्याणक महोत्सव, प्रयागराज में संगम पर वट वृक्ष के नीचे हुआ था | आज के ही दिन अप्सरा नीलांजना के नृत्य देखते हुए ,बीच में उसकी आयु समाप्त होने से वैराग्य हुआ | सांयकाल उत्तराषाढ नक्षत्र में 4000 हजार राजाओं ने भी साथ जिन दीक्षा ली थी|आपभी दर्शन-पूजन कर जीवन सफल करें।**
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली 21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
ये क्या कर रही हो निशा तुम.....अपनी पत्नी निशा को कमरे में एक और चारपाई बिछाते देख मोहन ने टोकते हुए कहा ...
निशा -मां के लिए बिस्तर लगा रही हूं आज से मां हमारे पास सोएगी....
मोहन-क्या ..... तुम पागल हो गई हो क्या ...
यहां हमारे कमरे में ...और हमारी प्राइवेसी का क्या ...
और जब अलग से कमरा है उनके लिए तो इसकी क्या जरूरत...
निशा-जरूरत है मोहन .....जब से बाबूजी का निधन हुआ है तबसे मां का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता तुमने तो स्वयं देखा है पहले बाबूजी थे तो अलग कमरे में दोनों को एकदूसरे का सहारा था मगर अब ....मोहन बाबूजी के बाद मां बहुत अकेली हो गई है दिन में तो मैं आराध्या और आप उनका ख्याल रखने की भरपूर कोशिश करते है ताकि उनका मन लगा रहे वो अकेलापन महसूस ना करे मगर रात को अलग कमरे में अकेले ....नहीं वो अबसे यही सोएगी...
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
मोहन-मगर अचानक ये सब ...कुछ समझ नहीं पा रहा तुम्हारी बातों को...।
निशा-मोहन हर बच्चे का ध्यान उसके माता पिता बचपन में रखते हैं सब इसे उनका फर्ज कहते हैं वैसे ही बुढ़ापे में बच्चों का भी तो यही फर्ज होना चाहिए ना..._"और मुझे याद है मेरा तो दादी से गहरा लगाव था मगर दादी को मम्मी पापा ने अलग कमरा दिया हुआ था ...और उसरात दादी सोई तो सुबह उठी ही नहीं ..."_ डाक्टर कहते थे कि आधी रात उन्हें अटैक आया था जाने कितनी घबराहट परेशानी हुई होगी और शायद हममें यसे कोई वहां उनके पास होता तो... शायद दादी कुछ और वक्त हमारे साथ ...मोहन जो दादी के साथ हुआ वो मैं मां के साथ होते हुए नहीं देखना चाहती ...और फिर बच्चे वहीं सीखते है जो वो बड़ो को करते देखते हैं मैं नहीं चाहती कल आराध्या भी अपने ससुराल में अपने सास ससुर को अकेला छोड़ दे उनकी सेवा ना करें ...आखिर यही तो संस्कारों के वो बीज है जोकि आनेवाले वक्त में घनी छाया देनेवाले वृक्ष बनेंगे ...।
मोहन उठा और निशा को सीने से लगाते बोला-मुझे माफ करना निशा... अपने स्वार्थ में.. मैं अपनी मां को भूल गया अपने बेटे होने के कर्तव्य को भूल गया ...और फिर दोनों मां के पास गए और आदरपूर्वक उन्हें अपने कमरे मे ले आए....
*🌞🛕✅🪔⛳विशेष:-भव्य आत्माओं,घर का प्रत्येक सदस्य अपना कर्तव्य क्या है ये बात जिस दिन समझ लेगा हमारा घर साक्षात स्वर्ग बन जायेगा!*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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