गुरुवार, 30 मार्च 2023

मेरी श्रद्धा

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*मेरी श्रद्धा*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी श्रद्धा✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल ग्यारस , शनिवार दिनांक 1अप्रैल  2023 को पांचवें तीर्थंकर सभी को  सुमति प्रदाता  सुमतिनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शिखरजी में अविचल कूट पर हुआ था | आज के ही  दिन संध्या के समय मघा नक्षत्र में मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 1 कोड़ा कोड़ी 84 करोड़ 72 लाख 81 हजार 781 मुनि सिद्ध हुए |हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली  03,06, 08, 14, 15,19,21,26,28,29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।* 

     ✍️एक सन्त थे ,जो एक छोटे आश्रम का संचालन करते थे ! 
एक  दिन पास के ही रास्ते से एक राहगीर को पकड़ करके अन्दर ले आये ! 
और शिष्यों के सामने उस से प्रश्न किया, 
कि यदि तुम्हें सोने की अशर्फियों की एक थैली, 
रास्ते में, पड़ी मिल जाए ; तो तुम क्या करोगे ?

वह आदमी बोला - 
"मैं तत्क्षण उसके मालिक का पता लगा कर उसे वापस कर दूँगा अन्यथा राज-कोष में जमा करा दूँगा ! 

सन्त हँसे और राहगीर को विदा कर के शिष्यों से बोले -  
"यह आदमी मूर्ख है !"

शिष्य बड़े हैरान कि गुरुजी क्या कह रहे हैं ? 
इस आदमी ने ठीक ही तो कहा है तथा 
सभी को ही यह सिखाया गया है - 
कि ऐसे किसी परायी वस्तु को ग्रहण नहीं करना चाहिए !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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थोड़ी देर बाद 
फिर सन्त किसी दूसरे व्यक्ति को अन्दर ले आये और उस से भी वही प्रश्न दोहरा दिया !

उस दूसरे राहगीर ने उत्तर दिया कि 
क्या मुझे निरा मूर्ख समझ रखा है ? 
जोकि स्वर्ण मुद्राएँ पड़ी मिलें और मैं लौटाने के लिए मालिक को खोजता फिरूँ ? 
तुम ने मुझे समझा क्या है ?
           
वह राहगीर जब चला गया - तो सन्त ने कहा, 
"यह व्यक्ति शैतान है !"

तो शिष्य बड़े हैरान हुए कि 
पहला मूर्ख और दूसरा शैतान, 
फिर गुरु जी चाहते क्या हैं ?
           
अबकी बार सन्त 
तीसरे राहगीर को पकड़ कर अन्दर ले आये और 
वही प्रश्न दोहराया !
           
तो उस राहगीर ने बड़ी ही सज्जनता से यह उत्तर दिया, 
"महाराज ! अभी तो कुछ कहना बड़ा मुश्किल है ! 
इस चाण्डाल मन का क्या भरोसा - कब धोखा दे जाए ? 
एक क्षण की खबर नहीं ! 
यदि परमात्मा की कृपा रही और सद्बुद्धि बनी रही, 
तो लौटा दूँगा !"

सन्त बोले - "यह आदमी ही सच्चा है ! 
इसने अपनी डोर परमात्मा को सौंप रखी है। 
ऐसे व्यक्तियों द्वारा कभी भी गलत निर्णय नहीं होता !"

ज्येष्ठ पाण्डव, सूर्य-पुत्र कर्ण, 
तो कर्म, धर्म का ज्ञाता था ! 
क्या कारण था कि 
वह अपने छोटे भाई अर्जुन से हार गया 
जबकि कर्म और धर्म दोनों में वह अर्जुन से श्रेष्ठ था ! कारण था कि 
अर्जुन ने तो अपने घर से निकलने से पहले ही 
अपने जीवन रथ की डोरी, 
भगवान श्री कृष्ण के हाथ में दे दी थी !

हमें भी इसी प्रकार अपने मन तथा जीवन की डोर गुरु-परमात्मा के हाथ में दे देनी चाहिए !

*👪✍️🌲⏰↔️विशेष:- भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस कहानी के माध्यम से हमें यह समझना आवश्यक है कि आज हमारा जिस धर्म में जन्म हुआ है उस धर्म के अनुसार आचरण करने से हमें सत्य का ज्ञान होगा। जब वह सत्य हमारे जीवन का लक्ष्य  होगा तब हमारा आत्म कल्याण होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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