शनिवार, 4 मार्च 2023

मेरा कर्तव्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा कर्तव्य ✍️🐒*

गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले
गन्नेका रस पीकर काम पर जाता हूँ।एक  गन्ने
की रस की दुकान पर गया !!

वह काफी भीड-भाड का इलाका था,
वहीं पर काफी छोटी-
छोटी फूलो की, पूजा की
सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें
थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर
भी था , इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड
रहती है !

मैंने रस का आर्डर दिया , मेरी नजर पास में
ही फूलों की दुकान पे गयी ,
वहीं पर एक तकरीबन 37
वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले फूलों के
हार बनाने का आर्डर दिया , तभी उस व्यक्ति के पिछे
से एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर
हाथ लगाकर उसे रस की पिलाने की गुजारिश
की !!

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पहले उस व्यक्ति का बच्चे के तरफ ध्यान नहीं था ,
जब देखा....तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना
हाथ रूमाल से साफ करते हुए" चल हट ...."कहते हुए भगाने
की कोशिश की !!
.
उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया !!
.
वो भीख नहीं मांग रहा था , लेकिन उस
व्यक्ति के दिल में दया नहीं आयी !!
.
बच्चे की आँखें कुछ भरी और
सहमी हुई थी, भूख और प्यास से लाचार
दिख रहा था !!
इतने में मेरा आर्डर दिया हुआ रस आ गया !!
.
मैंने और एक रस का आर्डर दिया उस बच्चे को पास बुलाकर उसे
भी रस पीलाया !!

बच्चे ने रस पीया और मेरी तरफ बडे
प्यार से देखा और मुस्कुराकर चला गया !!
उस की मुस्कान में मुझे भी
खुशी और संतोष हुआ.......लेकिन. ....वह व्यक्ति
मेरी तरफ देख रहा था, जैसे कि उसके अहम को चोट
लगी हो !!
.
फिर मेरे करीब आकर कहा"आप जैसे लोग
ही इन भिखारियों को सिर चढाते है"मैंने मुस्कराते हुए
कहा आपको मंदिर के अंदर इंसान के द्वारा बनाई पत्थर
की मूर्ति में ईश्वर नजर आता है, लेकिन ईश्वर द्वारा
बनाए इंसान के अंदर ईश्वर नजर नहीं आता
है..........मुझे नहीं पता आपके 500 रूपये के हार
से आपका मंदिर का भगवान मुस्करायेगा या नहीं, लेकिन
मेरे 10 रूपये के चढावे से मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा है।

*🎪⏰🪔👪✍️विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी के जीवन में भी ऐसे कुछ पल आते है जब हमारी अंतर आत्मा कहती है कि व्यक्ति विशेष की मदत करना चाहिए।जब हमारे अंदर श्रृद्धा भक्ति होने से ही यह सबकुछ होता है। अतः हम सभी को यथाशक्ति व्यक्ति विशेष की सहायता कर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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