रविवार, 26 मार्च 2023

महामारी का कारण

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*महामारी का कारण*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒महामारी  का कारण ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल षष्ठी , सोमवार दिनांक 27 मार्च  2023 को तृतीय तीर्थंकर सभी को  संभवता  प्रदाता संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक शिखरजी में धवल कूट पर हुआ था | आज के ही दिन संध्या के समय मृगशिर नक्षत्र में 1000 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 9 कोड़ा कोड़ी 12 लाख 42 हजार 500 मुनि सिद्ध भये | सभी धर्म प्रेमी दर्शन-पूजन करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। 

 राजा ने विशेष अनुष्ठान करके परमात्मा से प्रार्थना की कि यहां की प्रजा निरोगी व सुखी रहें। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा! तुम्हारी राजधानी के बीचों बीच जो पुराना सूखा कुंआ है, अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक-एक लोटा दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक  लोटा  दूध डाला जाना अनिवार्य है। 

अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था। उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे, अगर मैं अकेली एक  लोटा  पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक  लोटा  पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुई थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।

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दरअसल ऐसा इसलिये हुआ जब वहां की प्रजा ने भगवान की आकाशवाणी के अनुसार कार्य नहीं किया इस कारण से वह कर्म परेशानी का कारण बना। जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला। 

जैसा इस प्रसंग में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जाएं तो पूरे देश की जनता ऐसा बदलाव ला सकती हैं जिसकी आज हमें जरूरत है। 

*🔔🪔🙏⛳⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमें अपना यह मनुष्य भव सार्थक करना है तो हमें शास्त्रों के अनुसार अपने कार्य करते हुए कुछ ऐसे कार्य जो अकेले में सम्पन्न होते है और कुछ ऐसे कार्य जो सामूहिक किए जाते है।उन सभी कार्यों में हमारा सहयोग होना आवश्यक है।कब किस कार्य के पुण्य की हमें आवश्यकता पड़ जाएं कुछ नहीं कह सकते। इसलिए जब भी हमें अवसर प्राप्त हो ऐसे अवसर का लाभ अवश्य ही लेना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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