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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अनमोल रत्न ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली 11,12, 15, 16, 21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨👩👦👦आप सभी धर्मानुरागी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ निर्मल परिणामों से यथाशक्ति उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदलकर जीवन सार्थक करें।*
महर्षि कपिल प्रतिदिन पैदल अपने आश्रम से गंगा स्नान के लिए जाया करते थे। मार्ग में एक छोटा सा गाँव पड़ता था। जहाँ पर कई किसान परिवार रहा करते थे। जिस मार्ग से महर्षि गंगा स्नान के लिए जाया करते थे, उसी मार्ग में एक विधवा महिला की कुटिया भी पड़ती थी। महर्षि जब भी उस मार्ग से गुजरते, महिला या तो उन्हें चरखा कातते मिलती या फिर धान कूटते।
एक दिन विचलित होकर महर्षि ने महिला से इसका कारण पूछ ही लिया। पूछने पर पता चला की महिला के घर में उसके पति के अलावा आजीविका चलने वाला कोई न था। अब पति की मृत्यु के बाद पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी।
कपिल मुनि को महिला की इस अवस्था पर दया आ गई और उन्होंने महिला के पास जाकर कहा, “हे भद्रे ! मैं पास ही के आश्रम का कुलपति कपिल हूं। मेरे कई शिष्य राज-परिवारों से हैं। अगर तुम चाहो तो में तुम्हारी आजीविका की स्थाई व्यवस्था करवा सकता हूं, मुझसे तुम्हारी यह असहाय अवस्था देखी नहीं जाती।
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महिला ने हाथ जोड़कर महर्षि का आभार व्यक्त किया और कहा, “मुनिवर, आपकी इस दयालुता के लिए में आपकी आभारी हूं, लेकिन आपने मुझे पहचानने में थोड़ी भूल की है। ना तो में असहाय हूं और ना ही निर्धन। आपने शायद देखा नहीं, मेरे पास पांच ऐसे रत्न हैं जिनसे अगर में चाहूँ तो खुद राजा जैसा जीवन यापन कर सकती हूं। लेकिन मैंने अभी तक उसकी आवश्यकता अनुभव नहीं की इसलिए वह पांच रत्न मेरे पास सुरक्षिक रखे हैं।
कपिल मुनि विधवा महिला की बात सुनकर आश्चर्यचकित हुए और उन्होंने कहा, “भद्रे ! अगर आप अनुचित न समझे तो आपके वे पांच बहुमूल्य रत्न मुझे भी दिखाएँ। देखूँ तो आपके पास कैसे बहुमूल्य रत्न हैं ?
महिला ने आसन बिछा दिया और कहा, “मुनिवर आप थोड़ी देर बैठें, मैं अभी आपको मेरे रत्न दिखाती हूं। इतना कहकर महिला फिर से चरखा कातने लगी।
थोड़ी देर में महिला के पांच पुत्र विद्यालय से लौटकर आए। उन्होंने आकर महर्षि और माँ के पैर छुए और कहा, “माँ ! हमने आज भी हमनें किसी से झूठ नहीं बोला, किसी को कटु वचन नहीं कहा, गुरुदेव ने जो सिखाया और बताया उसे परिश्रम पूर्वक पूरा किया है।
महर्षि कपिल को और कुछ कहने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने महिला को प्रणाम कर कहा, “भद्रे ! वाकई में तुम्हारे पास अति बहुमूल्य रत्न है, ऐसे अनुशासित बच्चे जिस घर में हों, जिस देश में, हो उसे चिंता करने की आवश्यकता ही नहीं है। इनके उपर आपके निमित्त से जो सुसंस्कार दिये जा रहें है वे संस्कार ही इन्हें भगवान बनाएंगे।
*🔔👨👩👦👦✍️🐒💯विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हमारे स्वयं पर सुसंस्कार नहीं होने से हम अपने परिवार को संस्कारवान नहीं बना पा रहे है।आज भी हम स्वयं संकल्पित होकर सबकुछ योग्य गुरु के मार्गदर्शन से सबकुछ प्राप्त कर सकते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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