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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️सच्ची घटना बड़े काम की*
*💪👩🚒जैन आगमानुसार दीपावली*
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विहार करते हुए कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी को पावापुरी में पहुँचने पर *भगवान महावीर* देव कृत अतिशय "समवशरण" को त्याग कर के मन-वचन-काय का निरोध कर रत्नत्रय की पूर्णता हेतु ध्यान में लीन हो गए। इसलिए यह दिन *धन्य तेरस* के रूप में मनाया जाता है। यह दिन त्याग की कला सिखाता है, पर हम अज्ञानतावश सोना-चाँदी-बर्तन-मोबाइल आदि खरीद कर परिग्रह संचय कर रहे हैं।
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तत्पश्चात् दूसरे दिन चतुर्दशी को महावीर ने मन वचन काय, योग निरोध कर रत्नत्रय की पूर्णता को प्राप्त किया, यह *रूप चौदस* के नाम से लोकप्रसिद्ध हुआ। लेकिन हम आंतरिक रूप को छोड़ कर बाहरी रूप में मशगूल हुए मिथ्यात्व का प्रसार करते ब्यूटी पार्लर की और दौड़ लगाते है।
तीसरे दिन कार्तिक कृष्ण अमावस्या के प्रातः प्रथम प्रहर में भगवान महावीर ने समस्त कर्मबंध का नाश कर _(कर्मों का दिवाला निकाल कर )_ निर्वाण प्राप्त किया। फलस्वरूप उन का _*मोक्ष कल्याणक*_ *दिवाली* के नाम से लोकप्रसिद्ध हो गया। लेकिन हम लोक मूढ़ता का शिकार हो कर सब कुछ स्वीकार करते चले जा रहे है।
इसी दिन सांयकाल में उन के प्रमुख गणधर *गौतम स्वामी* को केवलज्ञान का उदय होने पर ज्ञान के प्रतीक दीपकों की पंक्तियां प्रज्ज्वलित कर हर्ष मनाया गया, जिस से यह दिन *दीपावली* के नाम से भी प्रख्यात हो गया।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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