शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

मां की ममता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒माँ की ममता*

*मानव और दानव में अंतर:-*
▶️✍️तीन दिन से भूखे थे शेर दम्पत्ति, मिल नही पाया था जंगल में कोई शिकार, घने पेड़ की छांव में अधलेटे राजा-रानी, नजर पड़ी एक जीव पर मिल गया आहार!

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शेरनी ने मुँह उठाकर सूंघा उसकी गंध वाली दिशा में दौड़ पड़ी लगाकर पूरा जोर, गाय का नवजात बच्चा था अकेला खड़ा, मौत आती देखकर माँ-माँ चिल्लाया पुरजोर, शेरनी भी तेजी से दौड़ी आगे-आगे बच्चा अपनी कोशिश भर उसने भी भरी कुलांचें, नवजात शिशु भी अपनी माँ को रहा पुकार, थोड़ी देर में ही फूल गई उस अबोध की आंतें!

अचानक दोनों के बीच हुआ ह्रदय परिवर्तन, बच्चा स्वयं शेरनी को माँ-माँ कहकर पुकारा, अपनी माँ समझकर मांग रहा था दूध, ढूंढ रहा था स्तन पीने दूध बेचारा!

अपने मुँह से शेरनी पर कर रहा था प्रहार, माँ की ममता जीत गई हार गए पकवान, शेरनी ने भी त्याग दिया मारने का विचार, माँ शब्द की वेदना न समझ सका इन्सान?

ऐसा करिश्मा न देखा न सुना, तीन दिन की भूखी शेरनी छोड़ दिया आहार, खेलने लगी उसके साथ पशु प्रेम का खेल, अचानक देने लगी उसे अपने बच्चे सा प्यार,

ढूँढते-ढूँढते शेर पहुंचा शेरनी के पास, भूखी अतड़ियों में खुशी की लहर दौड़ी, झपट्टा मारकर बच्चे की तरफ दौड़ा शेर, मुँह में बच्चा दबाकर शेरनी गर्दन मोड़ी!

शेर को धमकाते हुए शेरनी गुर्राई, ये भी है किसी दुखियारी माँ का लाल, इसके मर जाने से इसकी माँ कितना रोएगी, कभी -कभी पशु भी दिखलाते मानवता बेमिसाल!

जंगल का राजा भी हो गया चुपचाप, ममतमामयी शेरनी अपने स्वामी से लड़ गई, तीन दिन की भूखी प्यासी ये प्रेमी जोड़ी, पापी पेट हार गया माँ की ममता जीत गई!

भूखी शेरनी का भी दिल पसीज गया, हम तो पढ़े-लिखे मानव कहलाते, माँ-माँ शब्द की आवाज से ही, कई   बच्चे क्यों दानव बन जाते!😳 
अदभुत, अविस्मरणीय प्रसंग....!

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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