मंगलवार, 6 मई 2025

महत्व किसका

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 महत्व किसका✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 वैशाख शुक्ल दशमी  , 07 मई बुधवार 2025 कलि काल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री महावीर भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री महावीर भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
" *महत्व किसका* 

जीवन में अक्सर हम मूल्य  और महत्व  को एक ही समझ बैठते हैं। जो दिखने में बड़ा हो, महंगा हो, वही श्रेष्ठ है – यह सोच हमारे मन में घर कर जाती है। लेकिन सच्ची श्रेष्ठता तो उस व्यक्ति या वस्तु की होती है, जो दूसरों के लिए उपयोगी हो, भले ही उसका मूल्य थोड़ा ही क्यों न हो। इसी विचार को समझाने वाली एक प्रसंग  कहानी के द्वारा प्रस्तुत है...

एक दिन एक व्यक्ति की जेब में ₹500 का नोट और ₹1 का सिक्का साथ-साथ पड़े थे। सिक्का बड़े आदर से उस नोट को एकटक देखे जा रहा था।

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नोट ने मुस्कुराकर पूछा, "क्या बात है छोटे? इतने ध्यान से क्यों देख रहे हो मुझे?"
सिक्का भावुक स्वर में बोला, "आप जैसे महान, मूल्यवान से कभी मिलने का सौभाग्य नहीं मिला। आपका मूल्य हमसे पांच सौ गुना अधिक है। आप तो न जाने कितनों के काम आए होंगे, कितनी जगहों की सैर की होगी! मैं तो बस छोटा-सा सिक्का हूँ..."
नोट थोड़ी देर चुप रहा, फिर एक गहरी साँस लेकर बोला – "भाई, तुम जिसे मेरी किस्मत समझ रहे हो, वो असल में एक लंबी कैद की कहानी है।
कभी एक उद्योगपति की तिजोरी में बंद रहा। फिर घूस के रूप में एक अधिकारी को सौंपा गया – लगा अब तो दुनिया देखूंगा, किसी ज़रूरतमंद के काम आऊंगा… पर नहीं, फिर बैंक में जाकर बंद हो गया महीनों के लिए।
कभी बंगला खरीदने में बिल्डर के पास गया, तो वहां बोरे में ठूंसा गया, एक अंधेरी कोठरी में फेंक दिया गया – न रोशनी, न हवा। मैं तड़पता रहा... जीते जी जैसे मर गया था।
कभी किसी की मुस्कान नहीं देखी, किसी ज़रूरतमंद के हाथ में नहीं गया। अभी कुछ दिन पहले ही इस आदमी की जेब में आया हूँ…"
इतना कहकर नोट चुप हो गया। उसकी आँखों में नमी थी।
फिर बोला – "अब तुम बताओ दोस्त, तुमने क्या देखा दुनिया में?"
सिक्का मुस्कुराया और बोला – "मैं तो हमेशा सफर में रहा। 
कभी भिखारी की कटोरी में गया, कभी बच्चों की चॉकलेट की खुशी बना, 
कभी माँ की पूजा की थाली में भगवान के चरणों तक पहुँचा, कभी मंदिरों की घंटियों की गूंज में नहाया। कभी तीर्थों में स्नान किया, 
कभी दुकानों में रौनक बढ़ाई। 
हर किसी के कुछ काम आया, चाहे वो छोटा बच्चा हो या बुजुर्ग। बस यही मेरा जीवन है – *घूमते रहना, मुस्कानें बाँटना।"* 
नोट की आँखें भर आईं। उसने धीरे से कहा – "सच में, मूल्य बड़ा नहीं, उपयोगिता बड़ी होती है।"
इस कहानी से यही सीख मिलती है कि हमारा मूल्य (पैसे या पद से) चाहे जो भी हो, हमारी असली पहचान इस बात से बनती है कि हम कितनों के लिए उपयोगी हैं। जिंदगी का असली आनंद दूसरों के काम आकर, उनकी मुस्कान बनकर ही मिलता है।
 *बड़े बनने से ज्यादा जरूरी है, किसी के लिए 'महत्वपूर्ण' बनना।* 
*⏰🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎विशेष:-भव्य आत्माओं इस कहानी को आईना बना कर हमें अपने आप को देखना आवश्यक है। अगर हमनें अपने सुधार के बारे में नहीं सोचा तो यह मनुष्य भव हमारे लिए दुबारा प्राप्त करना दुर्लभ होगा। अतः स्वयं के बारे में अभी से ही विचार करना शुरू करें तो सबकुछ संभव है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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