*धन्य तेरस का महत्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️ जैनधर्म की सच्चाई सभी के काम की*
*💪👩🚒 धन्य तेरस का महत्व✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक कृष्ण 13, दिनांक 11 नवंबर शनिवार कलिकाल के छठवें तीर्थंकर सभी प्रकार से ओज तेज प्रदान करने वाले पदमप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। आज के ही दिन भगवान महावीर स्वामी ने योग निरोध किया था।🛕*
*🔔 जयपुर पंचांग के अनुसार▶️ दिनांक 11 नवबंर शनिवार 13:58 बजे तक धन्य तेरस है।▶️12 नवंबर रविवार को दोपहर 14:45 तक रुप चौदस रहेंगी।✍️13 नवंबर सोमवार को 14:57 तक अमावस्या है।🔔*
*🔔🪔 कार्तिक अमावस्या , दिनांक 13 नवंबर सोमवार कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक वर्धमान स्वामी का मोक्ष कल्याणक व आज ही संध्या काल में गौतम गणधर स्वामी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसलिए दिगंबर कुंदकुंद आचार्य की मान्यता वाले विश्व के धर्मावलंबी घर पर दीपावली पर्व मनाते है। नोट इसकी सम्पूर्ण पूजा विधि पूजन पाठ प्रदीप दिल्ली व इंदौर जबलपुर से प्रकाशित लाल जिनवाणी में उपलब्ध है।*
*इस माह में 15,18,24,27 तारीख को भी कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
धन्य त्रयोदशी (धनतेरस) जी हां ! जैन धर्म मे धन्य तेरस का बहुत महत्व है लेकिन वैसा नहीं जैसा हम लोग मानते है की लक्ष्मी तथा धन की पूजा करो, जिस दिन भगवान महावीर की दिव्य ध्वनि अंतिम बार खीरी थी उस दिन त्रयोदशी थी, इसलिए उस दिन को धन्य माना गया क्योकि उस दिन भगवान ने योग निरोध ( सभी कर्मों को समाप्त करने वाला ध्यान ) किया तथा अमावस्या के अंतिम पहर में मोक्ष प्राप्त कर लिया, लेकिन समय के प्रभाव से यह धन्य त्रयोदशी – धनतेरस में फिर सिर्फ धन की पूजा बन कर रह गई।
गणानां ईश:, गणेश:, गणधर – यह पर्यायवाची नाम श्री गौतम स्वामी जी के ही है, सब लोग इस बात को न समझ का गणेश, लक्ष्मी की पूजा करने लगे है वास्तव में गणधर देव, केवलज्ञान महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।
दीपक केवलज्ञान रूपी ज्योति का प्रतिक है, हमको अन्धकार रूपी मोह का नाश करना है केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए, हमें भगवान महावीर स्वामी – मोक्ष लक्ष्मी तथा गौतम स्वामी – गणों में ईश की पूजा करनी चाहिए, जो हम लौकिक गणेश व लक्ष्मी की पूजा करते है वो जैन धर्म में नहीं है, इस बारे में हम शास्त्रों तथा ग्रंथो में पढ़ सकते है तथा मुनि भगवन्तो से इस बारे में पूछना चाहिए, अन्यथा यहाँ गृहीत मिथ्यात्व कर्मो का बंध होता है
फटाके जलाना जिनेद्र देव की वाणी का अपमान है ! क्योकि
“अहिंसा परमो धर्म” यह जैनधर्म का प्रथम ओर अंतिम सिध्दांत है।
किसी भी देवी देवताओं की मात्र पूजा अर्चना करने से धन की प्राप्ति नहीं होती है। जबतक हमारे लाभांतराय कर्म का क्षय नहीं होगा तब तक हम जीवन भर भी किसी देवी देवताओं की पूजा करें तो हमारा समय ही व्यर्थ जाएगा। जिस प्रकार उचित समय में उचित भूमि में बीज बोने पर ही फल की प्राप्ति होती है।
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*🔔👪💯⛳भव्य आत्माओं, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर स्वामी ने समवशरण का त्याग कर दिया था। ओर अपने सम्पूर्ण कर्मो को समाप्त करने केलिए ध्यान किया था।इस प्रकार जैन शास्त्रो में कहीं पर भी उल्लेख नहीं मिलता है कि हमें इस दिन किसी प्रकार की कोई वस्तु या रत्न खरीदना चाहिए। अगर हम इस दिन कुछ सामग्री खरीदते है तो यह समझ लेना कि अभी हम स्वयं अपना संसार बढ़ा रहे है। हां आज अगर आप अपने आपको भगवान महावीर स्वामी का वंशज मानते है तो आपको इस दिन वीतराग मंदिरजी के लिए ,नवदेवताओ के निमित्त से, किसी भी पिच्छीधारी या त्यागी व्रतियों के लिए अपनी शक्ति अनुसार दान कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते है।*
*🎪🔔👪नोट:-अगर आप अपने पुण्य को बढ़ाना चाहते है तो इस पोस्ट को अन्य लोगों को भेज सकते है।*
आप सभी इस लिंक के द्वारा प्रमाण सागरजी महाराज ने इस पर्व का जैन आगम से समझाया है।
*https://youtu.be/pPS0O44UKE0?si=QTIIDVhCvEwb70C7*
*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज से ही आप अपनी नकारात्मकता को पहचान कर उसे सकारात्मक बनाए।जब आप अपने आप से संतुष्ट हो तो अपनी सकारात्मकता को योग्य समय व व्यक्ति को बांटकर अपना मनुष्य भव सार्थक करें।आप जिस प्रकार से वितरण करेंगे भविष्य में आपके पास वैसा ही लौटकर आयेगा। यही प्रकृति का नियम है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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